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चमेली रानी की चुदाई भाग-2

ममता अपनी जीभ को पूरे लण्ड पर चला रही थी और कभी-कभी लण्ड को मुँह से निकालकर बल्स को चाटती थी और गाण्ड के छेद पर भी जीभ चलाती थी। इस तरहरानी खूब मजे से भाई के लण्ड का मजा ले रही थी। जीभ से सहला-सहलाकर गाण्ड का छेद खुल गया था।रानी ने भाई की गाण्ड में एक उंगली गाड़ दी और उंगली से भाई की गाण्ड मारने लगी। फिर उसने गाण्ड पर थूका और दो उंगली घुसाकर गाण्ड मारने लगी। करीब 15 मिनट तक लण्ड को चूसने और गाण्ड मारने के बाद चिंटू के लण्ड ने पानी छोड़ दिया और जोश में अपनी बहन के सिर को लण्ड पर दबा दिया।रानी ने पूरा पानी गले के नीचे उतार लिया। लण्ड को जीभ से साफ करने के बाद उसने मुँह से लण्ड को निकाला और छपाक से दोनों उंगली को गाण्ड से बाहर निकाला।

चिंटू ने बहन को अपने सीने पर खींच लिया और पूछा- “कहाँ से ये सीखा… बहुत मजा आया बहना…”
ममता ने भाई को किस करते हुवे कहा की उसकी दोस्त सुधा ने सिखाया- “आज उसका बाप और नौकरानी रिंकू ऐसे ही प्यार कर रहे थे। अब तुम मेरी चूत चाटो…”रानी दोनों पाँव फैलाकर सीधा लेट गयी- “भैया मेरी चूत तुम्हारा इंतजार कर रही है…”
चिंटू ने जांघों के बीच बैठकर दोनों हाथों से उसकी कमर को जकड़कर चूत के क्लिट पर जीभ को ऊपर-नीचे किया।
ममता- “आहह… भैया… बहुत अच्छा…”
चिंटू अपनी उंगली और जीभ से बहन की चूत और गाण्ड को चाट रहा था। कभी-कभी दाँत से क्लिट को दबाकर खींचता था औररानी उछल पड़ती थी। चूत को चाटते-चाटते चिंटू दोनों हाथ आगे बढ़ाकर टाइट चूची को भी दबाने लगा। कभी उंगली से चूत की फांक को फैलाकर जीभ अंदर करता, तो कभी गाण्ड चूसने लगता था। करीब 10 मिनट चाटने के बाद उसने एक उंगली बहन की गाण्ड में घुसाया। गाण्ड गीली हो गयी थी और एक नहीं दो-दो उंगली आराम से गाण्ड के अंदर चली गयी।

ममता ने अपने हाथों से दोनों टांगों को पकड़कर अपनी ओर खींच लिया था और चूतड़ उछाल-उछाल कर चूत चुसाई का मजा ले रही थी। चिंटू एक साथ चूची दबा रहा था, चूत चाट रहा था और बहन की गाण्ड में उंगली पेल रहा था।रानी खूब जोर-जोर से कमर उछाल रही थी और भाई से चुसाई का मजा ले रही थी।रानी की चूत ने पानी छोड़ दिया। चूत से सफेद गाढ़ा रस बाहर आने लगा और चिंटू ने चूत फैलाकर सारा रस चाट लिया। चिंटू ने बहन की चूत चाटते हुए सोचा की कल दो और चूत, चमेली और सीमा की भी इसी तरह चाटेगा। चिंटू से अब बर्दास्त नहीं हुआ। उसे लगा की झड़ जाएगा और फटाक से सीधा बैठकर लण्ड को बहन की चूत पर रखा। लण्ड से सफेद रस निकलकर चूत पर फैलने लगा।रानी ने रस को चूत पर फैलाया और हाथों में उठा-उठाकर रस को प्यार से चाटने लगी। दोनों थक चुके थे। एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गये।

अगले दिन चिंटू स्कूल नहीं गया। उसने सोच रखा था की आज माँ (चमेली) को चोदना है। माँ ने बार-बार उसे स्कूल जाने के लिए कहा लेकिन चिंटू नहीं माना। चिंटू मौके का इंतेजार करता रहा। करीब 10:30 बजे चमेली नहाने गयी। 15 मिनट के बाद बाहर आई एक ब्लैक पेटीकोट और सफेद ब्रा में। बालों को तौलिया से बाँध रखा था। चिंटू ने सोचा बस यही मौका है। जैसे ही चमेली चिंटू के बगल से निकली, चिंटू ने दोनों हाथों से माँ के कंधों को दबाकर उसे दीवाल से सटा दिया और खूब जोर से चूमने लगा। फिर कंधों से हाथ हटाकर दोनों मस्त चूचियों को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा।

चिंटू चमेली को बहुत बेदर्दी से मसल रहा था। कल चिंटू ने सीमा की चूचियों को प्यार से सहलाया था और अभी माँ की चूची को आँटे की तरह मसल रहा था। 5 मिनट तक चूमने और मसलने के बाद चिंटू ने अपना मुँह माँ के होंठों पर से हटाया और कहा- “तुम बहुत ही रसीली हो। तुम्हारे होंठ बहुत टेस्टी हैं…”
चमेली ने अपनी चूची सहलाते हुए कहा- “तुम तो मुझे मार ही डालोगे। ऐसे कोई मसलता है, प्यार से सहलाओ और मजा लो…” कहते हुए चमेली ने अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। चूचियों को ब्रा से बाहर निकाला और कहा- “अब मजा लो, प्यार से…”

चिंटू ने थोड़ी देर तक दोनों नंगी चूचियों को मसलकर मजा लिया। कभी चूची को नीचे से उठाकर दबोचता था, तो कभी घुंडियों को मसलता था। थोड़ा मसलने के बाद ही निपल कड़े हो गये और लंबे भी, ½ इंच से बड़े निपल्स के चारों ओर एक ब्राउन कलर का घेरा करीब एक इंच की गोलाई में फैला था। चूची और भी टाइट हो गयी। चिंटू ने एक निपल को मुँह में लेकर चुभलाना चालू किया और दूसरी चूची को मसलता रहा। बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूसा और एक हाथ को नीचे नाभि पर लाया। पेट को सहलाते-सहलाते नाभि के छेद पर उंगली गोल-गोल घुमाया और हाथ नीचे बढ़ाया।

पेटीकोट का नाड़ा हाथ में आया और झटके से नाड़ा खींच दिया। नाड़ा खुलते ही पेटीकोट जमीन पर गिर पड़ा। चिंटू का हाथ उसकी बुर पर था। बुर पर हल्के-हल्के बाल थे। चिंटू उंगली से बुर के होंठों को मीजने लगा। माँ का बदन तन गया। चमेली की बुर का मजा लेते लेते चिंटू ने अपना पायजामा खोलकर नीचे गिरा दिया। लण्ड पूरा तना हुआ था और चमेली की बुर पर खटखटाने लगा। चूमना और सहलाना छोड़कर दोनों हाथों से चमेली के दोनों उभरे हुये चूतरों को जकड़कर लण्ड को बुर में जोर से दबाया। फिर उसी पोज में उसे बेतहासा चूमने लगा। चमेली आँखें बंद करके चुपचाप खड़ी थी, शायद उसे शरम आ रही थी। कुछ देर के बाद चमेली दीवाल से सटकर नीचे फिसलने लगी और अपने को फर्श पर सीधा लिटा लिया।

चिंटू उसके ऊपर छा गया। चिंटू चमेली को बेतहाशा चूम रहा था, होंठों को, गालों को काट रहा था और चूचियों को मसल रहा था।
चमेली ने महसूस किया की चिंटू का लण्ड पूरा तन गया है। चमेली ने सोचा की अगर जल्दी नहीं चुदवाएगी तो उस दिन जैसा चिंटू का लण्ड फिर पानी छोड़ देगा। यह सोचकर चमेली ने हाथ बढ़ाकर लण्ड को पकड़ा और बुर के मुहाने पर रखा और नीचे से गाण्ड को उछाला। पूरा लण्ड बुर के अंदर चला गया। उसकी बुर भी चुदवाने को बेताब थी और चिंटू का लण्ड चोदने को। चिंटू चमेली को जोर-जोर से चोदने लगा। लेकिन जमीन पर घुटनों में चोट लग रही थी। वह जोर-जोर से धक्का नहीं मार पा रहा था।

चमेली को भी चूतड़ उछलने से चोट लग रही थी।- “चलो बेटे, बेड पर चुदाई करेंगे…”दोनों अलग हो गये। तुरंत चमेली बेड पर सीधा हो गयी। लेकिन चिंटू ने लण्ड अंदर नहीं घुसाया। उसने चमेली की टांगों को पूरा फैला दिया और पूरी बुर को मुँह में भरकर चूसने लगा। बुर को चूसते-चूसते क्लिट को काट लेता था और चमेली उछल पड़ती थी। अभी तक चमेली ने 8 लण्ड का मजा लिया था लेकिन कभी किसी मर्द ने उसकी बुर को चूमा या चाटा नहीं था। सिर्फ़ उसकी एक नौकरानी और माँ ने कभी-कभी बुर को चूमा चाटा था लेकिन ऐसा मजा कभी नहीं आया था। चिंटू पूरी जीभ बुर में डालकर बुर का स्वाद ले रहा था और दो उंगली गाण्ड में घुसाकर मजा ले रहा था। पिछली रात बहन ने चूत को चटवाकर मजा लेना सिखाया था और चिंटू माँ की बुर को चूस-चूसकर मजा ले रहा था। उंगली करते करते गाण्ड बिल्कुल गीली हो गयी थी और चिंटू को लगा की गाण्ड में लण्ड भी घुस जाएगा लेकिन पहले वो बुर का पूरा मजा लेना चाहता था। उसने एक बार फिर पूरी बुर को चूसा और आगे बढ़कर माँ के होंठों को चूमने लगा और एक हाथ से लण्ड को बुर में डालकर चोदने लगा। जोर-जोर से धक्का मारने लगा। हर धक्के के साथ चमेली की आह्ह निकल जाती थी।

चमेली रानी की चुदाई भाग-2
चमेली- “कैसा लग है बेटे, माँ को चोदने में…”
चिंटू- “आह्ह माँ बहुत अच्छा लग रहा है। रोज चुदवाओगी?”
चमेली- “मैं हमेशा लण्ड लेने को तैयार हूँ। बहुत साल पहले एक साथ 5-5 आदमियों से चुदवाई थी उस दिन भी इतना मजा नहीं आया था। धीरे-धीरे चोदो…”
चिंटू चुदाई करता रहा। कभी रुक कर चूची को मसलने लगता था।
चमेली चीख उठती थी- “मादरचोद, रुकता क्यों है? गाण्ड में दम नहीं है तो चोदना शुरू क्यों किया?”
और चिंटू जोर-जोर से धक्का मरने लगा और पूछता- “प्रमोद का लण्ड खाओगी?”
चमेली- “हाँ… बेटा, प्रमोद से चुदवाऊँगी…”
चिंटू- “मालिक का लण्ड बुर में लोगी?”
चमेली- “हाँ… मालिक से भी चुदवाऊँगी…”
चिंटू- “मालिकानी के सामने मालिक का लण्ड चूसोगी?”
चमेली- “हाँ… चूसूँगी…”
चिंटू- “अपनी बेटी के सामने मेरा लण्ड बुर और गाण्ड में लोगी?”
चमेली- “हाँ… लूँगी…”
चिंटू- “मेरे और दोस्तों से भी चुदवाओगी?”
चमेली- “हाँ… सबसे चुदवाऊँगी…”
चिंटू- “साली, रंडी बनोगी?”
चमेली- “हाँ… मैं रंडी हूँ… हाँ…”

दोनों गंदी-गंदी बातें करते-करते चुदाई कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को कसकर जकड़ लिया और चिंटू ने माँ की बुर में पानी छोड़ दिया। चमेली उसे चूमने लगी और तब तक चूमती रही जब तक दोनों बिल्कुल ठंडे ना हो गये। चिंटू बेड से उतरकर खड़ा हो गया और घूर-घूर कर प्यार से चमेली के बदन को देखने लगा।चिंटू- “आखिर क्या है चमेली में की सभी मर्द उसकी जवानी से खेलना चाहते हैं…” चिंटू ने अबतक चमेली के अलावा अपनी बहनरानी और सीमा को ही ध्यान से देखा था।कल मालिकानी को जोश में आकर चोद लिया लेकिन आज जो मजा माँ को चोदने में आया वैसा कल नहीं आया था। मालिकानी थोड़ी मोटी थी और कोई सुंदर भी नहीं थी।

लेकिन चमेली का एक-एक अंग छील-छील कर बनाया गया था, करीब 5’5” लंबी, घने काले और लंबे बाल, आलमोस्ट गोल चेहरा, बहुत गोरा नहीं लेकिन बहुत आकर्षक रंग, बड़ी और चमकीली आँखें, गालों में बड़े-बड़े गड्ढे, आकर्षक होंठ, ऊपरी होंठ पतले जब की निचले होंठ मोटे और कूबसूरत कताव, जब वो हँसती थी तो उसके सफेद चमकदार दाँत दिखाई देते थे। उसकी आँखों और चेहरे पर हमेशा मुशकुराहट रहती थी। चिंटू की नजर उसकी लंबी गर्दन और चौड़े कंधों के नीचे फिसली, उसकी बांहें मोटी नहीं लेकिन मांसल थीं बिना मोटापा के, कुहनी तक शंकु के आकार में। उसकी चूचियां पूरी गोल, कसी और रसीली थीं, जिसका मज़ा वो ले चुका था। अब निपल्स सामान्य आकार में थे, आधा इंच लंबे और मोटे।
चिंटू अपनी कुँवारी बहन, मालिकानी और अपनी प्रेमिका सीमा कि चूचियां मसल चुका था। हालांकीरानी और सीमा की चूचियां कसी थीं, जब की चमेली की चूची स्पंजी थी। ये अपने भार के कारण थोड़ा लटक गईं थीं।

चमेली मुश्कुराई और चिंटू से पूछा- “अब तो चोद लिया, फिर क्या देख रहा है?” उसने अँगड़ाई ली- “फिर चोदना है तो चढ़ जाओ। मेरी बुर तैयार है…”
चिंटू- “मैं देख रहा हूँ की आखिर तुममें क्या है की सभी तुम्हें चोदना चाहते हैं…”
चमेली ने बेटे का लण्ड हाथ में लिया और मसलने लगी- “बहुत मस्त लण्ड है। बाप के लण्ड से करीब दो इंच लंबा और मोटा भी, सुपाड़ा भी बहुत मस्त है। लेकिन तेरे बाप का सुपाड़ा इससे भी बड़ा है। जब उसने पहली बार मेरी बुर में सुपाड़ा पेला था तो लगा की मैं मर जाऊँगी जबकि मेरी चूत को उससे पहले 5-5 लोगों ने चोद डाला था…” वो चिंटू के सुपाड़े को चुभलाने लगी।
चिंटू ने कई बार माँ की पहली चुदाई और उन 5 लण्डों के बारे में पूछा लेकिन वो बस सुपाड़ा चूसती रही। चिंटू शहर की सबसे आकर्षक और मशहूर महिला को चोदकर बहुत खुश था, सौभाग्य से वो उसकी माँ थी। उसने चमेली की पहली चुदाई का आनंद लिया। उसको पिछली शाम मालिकानी (सीमा की मां) की चुदाई से भी ज्यादा आनंद आया।

अब चिंटू सीमा की चूत में अपना लण्ड पेलना चाहता था।
चिंटू से छूटने के बाद चमेली ने खाना पकाने से पहले कुछ समय के लिए विश्राम किया। लंच के बाद उसने फिर से खुद को अपने बेटे को पेश किया और इस बार बेटे के पूरे शरीर पर अपने फूले स्तन को रगड़ा- “बेटा, तुमने मेरे चरित्र को खराब कर दिया है। शादी के बाद मैंने सोचा था, मैं किसी और को मुझे चोदने की अनुमति नहीं दूँगी, लेकिन तुमने मेरे चरित्र को खराब कर दिया। तुमने मुझे इतनी मस्ती दे दिया है की मेरी बुर अब अधिक से अधिक लण्ड चाहती है। बोलो अब किससे पहले चुदवाना है। उस मादरचोद प्रमोद से या तेरी रानी सीमा के बाप से…”
उसने चिंटू के खड़े लण्ड को सहलाया और कहा- “तुम केवल देखो कि मैं कैसे तुम्हारे मालिकजी और गांव के अन्य अमीर लोगों से कैसे लूटने जा रही हूँ…” उसने लण्ड को निगला और चूसा। कुछ समय बाद उसने चिंटू से जोर से चोदने के लिए कहा। चिंटू ने चमेली को चोदकर संतुष्ट कर दिया और उसके बाद दोनों सो गये।

लेकिन चिंटू लंबे समय के लिए सो नहीं सका। उसके अचेतन मन ने उसे जगा दिया। उसे याद आ गया की सीमा (मालिकजी की बेटी) ने 3:00 बजे दोपहर में उसे बुलाया है। उसने समय देखा, लगभग 2:30 बज रहे थे।
नग्न सो रही युवती को देखा, उसने उसे उठाया- “माँ… मैं मालिकजी के घर जा रहा हूँ। सीमा ने मुझे बुलाया था…”
चमेली- “ओके, आज जरूर चोदना उसे…” और कहा की वापस आते हमय मालिक से ₹ 50000 ले लेना और पूछना की वह मेरी चुदाई कब करना चाहता है…” वह उठी और चिंटू के पीछे दरवाजा बंद किया।
चिंटू आधे घंटे में अपने गंतव्य पर पहुंच गया। गार्ड उसे जानता था इसलिये उसे अंदर आने दिया। उसे ना तो मालिकानी दिखाई दी और ना ही कोई नौकर। वह सीधे सीमा के कमरे में चला गया।

सीमा चिंटू को अंदर देखकर वह उठी और मुश्कुराई- “तुम समय पर हो…” उसने टिप्पणी की।
चिंटू- “मैं देर कैसे कर सकता हूँ प्रिये। मैं पूरी रात सो नहीं सका…” चिंटू ने झूठ बोला।
पिछली शाम को सीमा के स्तन मसलने के बाद से, वह दो महिलाओं को पहले ही चोद चुका था, उसकी माँ के साथ ही अपनी माँ को भी। उसने सीमा को दोनों बाहों में लिया और उसे चूमा। वह भी इस पल का इंतजार कर रही थी। उसने जोश में जवाब दिया। जल्द ही उसकी फ्राक उसके शरीर से अलग थी, अब वह केवल ब्रा और पैंटी में थी।
चिंटू ने सीमा से पूछा- “तुमने पहले ब्रा कभी नहीं पहनी थी…”
सीमा- “तुम्हें कैसे पता है? तुमने तो बिना फ्राक मुझे पहले कभी नहीं देखा…”
चिंटू- “मुझे पता है…” चिंटू बोला- “ओह, प्रिये तुम सुंदर हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…” यह कहते हुवे चिंटू ने उसके स्तनों को सहलाया और चूमा। हालांकि चिंटू ने पहले से ही कुछ महिलाओं और उसकी बहन को चखा था, उसको सीमा वास्तव में पसंद आई। वह उसके शरीर को सहलाने के साथ ही चूम रहा था।
“हमारे पास समय बहुत कम है…” सीमा फुसफुसाई। उसने ब्रा को खोलकर उसके स्तनों को मुक्त कर दिया और चिंटू के मुँह में एक निपल पेल दिया- “बेटा मुझे चूसो, तुमको बहुत भूख लगी है…”

चिंटू न सिर हिलाया और एक के बाद एक दोनों स्तनों को चूसा और सीमा को बिस्तर पर धक्का दे दिया। चिंटू ने सीमा के पैरों से चड्डी को नीचे खींच लिया और उसको नंगा कर दिया। वह खड़ा होकर उसके सौंदर्य को देखता रहा। वह केवल 18 साल की थी और पतले शरीर की थी। न तो वह अपनी बहनरानी की तरह नाजुक और प्यारी थी और न ही चमेली की तरह सेक्सी और आकर्षक। फिर भी वह सुंदर थी। चिंटू को बुरा लगा की वह उससे शादी नहीं कर सकता था।
सीमा- “चिंटू… जैसा मैंने पिछली शाम को तुमसे कहा था, मैंने तुमको सबकुछ दिया है। तुम्हें और अधिक देखना है या मैं कपड़े पहन लूँ?”
चिंटू नीचे झुका और योनी को सहलाया- “सीमा, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। मैं शादी करना चाहता था, हालांकि की मैं जानता हूँ की यह संभव नहीं है…” उसने योनी के होठों को चूमा और झाँटों को सहलाया। वह योनी को सहलाता और क्लिट को मसलता रहा।
उसकी मां चमेली ने चोदते समय उसे सिखाया था की सिर्फ सहलाने और क्लिट मसलने से एक मृत महिला को भी कैसे उत्तेजित किया जा सकता है।
जैसे ही चिंटू ने क्लिट दबाया, सीमा उछल गई- “आह…”

चिंटू ने उसके क्लिट को दांत से पकड़ा लिया और धीरे-धीरे उसे चबाने लगा। सीमा उत्तेजित हो गई। चिंटू क्लिट के साथ ही योनी के होंठों को चबा गया था और आनंद ले रहा था। उसने तो चमेली के क्लिट और योनी को भी चखा था लेकिन उसकी स्वाद और गंध बेहतर थी। वह अपनी बहन की चूत का स्वाद भूल गया जो उसने कल रात को खाया था। अब उसने सीमा को उंगली की।
“ओह चिंटू, इसे मत करो… मैं कुंवारी रहना चाहती हूँ, मेरी शादी सिर्फ कुछ ही दिन दूर है। आह्ह… चिंटू, बहुत मजा मत करो, मैं मर जाऊँगी। ओह्ह… मुझे मेरी अपनी आँखों में मत गिराओ… जो आपने किया है उससे मेरी चूत जल रही है, मेरी चूची कस रही है। उसने अपनी चूची को मसला। आह्ह… नहीं, एक उंगली और पुश करो दोनों एक साथ। हाँ हाँ, तेजी से, तेजी से और जोर से, तुम क्या कर रहे हो? आह्ह… मेरी गाण्ड खोद रहे हो, चाटो, मेरी गाण्ड चाटो। आह तेजी से गाण्ड में दो उंगली से चोदो। मैं चुदना चाहती हूँ, लेकिन मैं कुंवारी रहना चाहती हूँ। आप चाहेंगे कि कुछ दिन बाद मेरे पति मेरी ‘सील’ (कौमार्य) टूटी हुई देखकर मुझे गाली दें… और साथ ही मेरे परिवार को भी… मुझे चोदो। आह्ह…”
चिंटू ने उसके शरीर से मुँह और उंगली हटा लिया और अचानक अपनी प्रेमिका की गाण्ड के अंदर अपने लण्ड को पेल दिया।
“ओह राजा… मेरी गाण्ड में दर्द हो रही है…”

चमेली रानी की चुदाई भाग-2
लेकिन चिंटू ने धीरे-धीरे उसकी गाण्ड के छेद को चिकना बनाया और फिर उसकी गाण्ड में पेल दिया। वह उसे अपने सीने की ओर करके उसके पैरों को धक्का देकर आगे से उसे गाण्ड में चोदा था। उसने सीमा को चूमा और उसके कसे स्तन को निचोड़ा। बोला- “रानी, मैं तुम्हारे पास चुदाई करने के लिए आया था, लेकिन टूटी सील देखकर तुम्हारा पति तुम पर क्रोधित हो सकता है, इसलिए मैंने अपने लण्ड को तम्हारी कसी गाण्ड का स्वाद देने के बारे में सोचा…”
तब चिंटू उसकी गाण्ड चोदता रहा। लगा वो उसके लण्ड से खुल जाएगी। उसे चमेली और सेटानी की चुदाई किया था जो कभी दर्द महसूस कर रही थी। सीमा कि गाण्ड का छेद बहुत तंग था। सीमा के पूरे शरीर में अकड़न हो गयी।
सीमा “चिंटू प्लीज लण्ड बाहर निकालो, बहुत दर्द कर रहा है। मेरी छोटी सी गाण्ड फट गयी। लगता है खून भी निकलेगा आह्ह… चिंटू जिद मत करो इससे अच्छा है की लण्ड निकालकर मेरी चूत ही फाड़ डालो, मर जाऊँगी… आ कोई मजा नहीं… आह… चिंटू धीरे-धीरे पेलो। थोड़ा और धीरे… आह्ह अब ठीक लग रहा है…”

कुछ समय के बाद सीमा ने भी आराम किया और अपने जीवन की पहली चुदाई का मज़ा लिया। उसकी गाण्ड का कौमार्य टूटा चुका था और असली कौमार्य बचा हुअ था। उन लोगों ने चुदाई किी। जब चिंटू चरमोत्कर्ष के कगार पर आया तो उसने सीमा के मुँह में झड़ने का अनुरोध किया। वो शुरू में विरोध की लेकिन बहुत मनाने के बाद मान गई। चिंटू ने गाण्ड से लण्ड बाहर निकाला और सीधे उसके मुँह में पेल दिया। उसको निश्चित रूप से गंध पसंद नहीं आई और उसने मुँह बनाया लिकिन सब पी गयी, कुछ वीर्य उसके होठों से बाहर बहने लगा।
उसने उंगलियों से उसे साफ किया। लण्ड सिकुड़ने के बाद उसने बाहर खींच लिया। चिंटू ने चूत को सहलाया और कहा- वह हमेशा से इस सुंदर माल को चाहता था और अब कोई और इसका मज़ा लेगा।

सीमा ने उसे चूमा और कहा- पति के अलावा केवल चिंटू का लण्ड ही इस चूत के अदर जायेगा।
शादी के बाद जब भी वो यहाँ आयेगी तो वो चुदाई के लिए चिंटू के घर आयेगी। चिंटू उसकी चूत से खेलता रहा और उसका लण्ड फिर खड़ा हो गया। सीमा फिर से सीधा लेट गई और चिंटू को उसके पैरों के बीच बैठने के लिए कहा। उसने चिंटू से उसके ऊपर लेटने को कहा और उसने लण्ड को अपनी योनी की दरार पर रगड़ा। चिंटू अपना लण्ड पकड़ना चाहता था लेकिन सीमा ने उसे रोक दिया और उसने खुद लण्ड को अपनी क्लिट और योनी के छेद पर रगड़ा। रगड़ने से चूत की फांकें चौड़ी होने के साथ चूत गीली हो गयी। चिंटू ने महसूस किया कि उसका लण्ड योनी की फांकों के बीच फँस गया है तो उसने दबा दिया।
सीमा ने चेतावनी दी- “तुम दबाओ मत दो, मुझे करने दो…”

उसने लण्ड चलाने की गति बढ़ाई और थोड़ा लण्ड योनी में घुस गया । सीमा बंद आँखों से मज़ा ले रही था लेकिन उसका हाथ बड़ी सफाई से कर रहा था । चिंटू अपने लण्ड पर सीमा की चूत की कोमलता और गीलापन महसूस कर सकता था ।उसने उसके गालों और होठों को चूमा और अपने चूतड़ों को धक्का दिया जिससे आधा लण्ड चूत के अंदर सरक गया ।चिंटू ने रुकावट महसूस की, सीमा ने भी दर्द महसूस किया और वो तुरंत लण्ड को थोड़ा ऊपर खींची ।लेकिन चिंटू नियंत्रण नहीं रख सका और चूत के अंदर ही वीर्य छोड़ दिया । दोनों ने आराम महसूस किया । उसने उसके टांगों को उसकी कमर पे लपेट लिया, उसे सहलाया और मज़ा देने के लिए धन्यवाद दिया ।“तुमने तो मुझे लगभग चोद ही दिया है…” यह कहकर सीमा ने चिंटू को नीचे धकेल दिया । दोनों ने कपड़े पहने और सीमा ने चिंटू को आश्वासन दिया की ससुराल से वापस आने पर वो उसका पूरा लण्ड अपनी चूत के अंदर लेगी ।

कुछ समय के बाद मालिकानी कुछ अन्य महिलाओं के साथ लौट आई । उसने नशीली आँखों से चिंटू को देखा लेकिन चिंटू के लण्ड को उसकी बुर में लेने का कोई मौका नहीं था । उसने चिंटू को आँख मारी और उसने सिर हिलाया जैसे कह रहा हो कि उसने उसकी बेटी को नहीं चोदा है । उसने उसे आते रहने और जितना हो सके काम में उनकी मदद करने के लिए कहा ।जो हुआ उससे सीमा खुश थी ।अगर चिंटू उसकी चूत के अंदर लण्ड पुरा पेल भी देता, तो निश्चित रूप से वो उसे मना नहीं करती । उसने उसके कौमार्य को बरकरार रखते हुए लण्ड का मजा देने के लिये चिंटू को धन्यवाद दिया । चिंटू बहुत बहुत खुश था । उसने प्रमोद के प्रति आभार भी व्यक्त किये की चमेली (अपनी मां) के बारे में उसकी अश्लील बातों ने ही उसे महिलाओं के साथ चुदाई करने के लिये प्रेरित किया था और पिछले कुछ दिनों में वह दो कुंवारी और दो परिपक्व महिलाओं के साथ चुदाई का मजा ले चुका था ।

चिंटू सोच रहा था की उसकी खुद की आंखों के सामने में प्रमोद द्वारा चोदे जाने के लिए चमेली को समझाना पडेगा । तभी उसे याद आ गया कि चमेली ने मालिकजी से पैसे लेके आने के लिए उससे कहा था । उसने मालिकजी के कार्यालय में प्रवेश किया और अपने पिता वहाँ बैठे देखा । उनके पिता से पूछताछ की कि वह वहां क्या कर रहा है । चिंटू ने उनको बताया कि मालिकानीने मालिकजी के लिए कुछ संदेश भिजवाया था । उसने मालिकजी की केबिन में प्रवेश किया और मालिकजी की तरफ देखकर मुस्कुराया ।

मालिकजीने उसे बैठने के लिये कहा ।

चिंटू :- “मालिकजी, चमेली आपसे चुदवाने को तैयार हो गयी है ।

उसने रुपये लाने को कहा है । पूरा 50000/- जो आपने कहा था…”

मालिक के चेहरा ख़ुशी से चमक उठा । उन्होंने चिंटू का हाथ पकड़ा और पूछा, “चमेली ने ऐसा कहा?”

“हाँ, मालिकजी…. लेकिन आप उसे चोदेंगे कहाँ पर ? आपके घर में…? मालिकानी तैयार नहीं होगी… !”

“अरे नहीं, यही पीछे वाले कमरे में ।”

उस कमरे को दो दरवाजे है । एक दरवाजा इस कार्यालय से और एक दरवाजा पीछे से है । मैं और मेरे दोस्त इस कमरे का उपयोग आराम करने के लिए करते है । एक चाबी तुम अपने पास रख लो और चमेली को पीछले दरवाजे से अंदर ले आना ।मालिक जी ने उनके मुनीम को (चमेली के पति) आवाज देकर बुलाया और उसे कुछ निर्देश दिये । चिंटू के पिता ने तिजोरी से पैसे निकाल लिए और एक बैग में डालके मालिक को दिये । मुनीम के कमरे से बाहर जाने के बाद मालिकजीने वो बैग चिंटू के हाथ में थमा दिया और कहा, “कल शाम को चमेली को साथ लेकर आना…. मैं वो पीछे वाला कमरा तैयार रक्खुंगा और किसी को इस बात का पता भी नही चलने दुंगा…!”“मेरे बाप को इस बारेमे भनक भी नही पडनी चाहीए…. इस बात का भी आपको खयाल रखना पडेगा…”, चिंटू ने कहा ।

एक नौकर शरबत के दो गिलास ले आया । अपने बेटे के साथ मालिक इतनी अच्छी तरह पेश आ रहा है यह देखकर मुनीम को आश्चर्य हुआ । वो बेचारा तो इस बात से अनजान था कि कल पीछे के कमरे में उसकी नाक के नीचे उसकी अपनी बीवी मालिक के लण्ड अपने मुँह में और चूत में लेने वाली है । शरबत पिते पिते चिंटू ने अचानक पूछा, “मालिकजी, आपकी बेटी सीमा बहोत प्यारी है, जब वो ससुराल चली जाएगी …आप बहोत अकेला महसूस करेंगे ।” “हाँ चिंटू, मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ….. इकलौती बेटी है वो मेरी ! मुझे पता है… वह भी तुम्हे बहुत ज्यादा पसंद करती है । है ना?” “हाँ… मालिकजी, शादी के बाद वो कही दूर चली जाएगी ये सोच के ही मुझे बहुत दु:ख होता है । उसने मेरी जिंदगी खुशियोंसे भर दी थी…..!”

मालिक जी को कहां पता था यह जवान लड़का पहले ही उसकी मोटी बिवी और बेटी को चोद चुका है । चिंटू:- “मालिकजी, आप चमेली के पीछे क्यों पडे हैं ? क्या मालिकानी आपको अच्छी नही लगती? मुझे तो वो बहुत प्यारी लगती है.” मालिकजी:- “तू बच्चा है, तुझे नहीं मालूम, साली (मालिकानी) बिल्कुल थूल थूल हो गयी है । उसमें कुछ मजा नहीं है कही भी हाथ लगाओ तो लगता है की माँस के लोथडे (मीट लोफ) को दबा रहा हूँ । लेकिन चमेली को देखते ही पूरे बदन में खुन दौड़ने लगता है… बहुत मजा आएगा साली को दबाने में…” मालिक पुरा गरमा गया था । चिंटू ने फिर पूछा, “मालिका नी के अलावा और किस किस को चोदा है अब तक ?” “अरे बेटे, जवानी के दिनों में तो बहुतो को चोदा है, जो औरत घर में आती थी सबको बहला फुसलाकर या पैसा देकर चोद लेता था…” “तो फिर चमेली को क्यों नहीं चोदा । वो भी तो आपके घर में आती जाती थी ।

आज 30 साल की उम्रमें ऐसी मस्त लगती है तो पहले कैसी लगती होगी…?” “पुछ मत बेटा, उसको देख-देखकर मैंने जितना पानी गिराया है उतना मैंने मालिकानी को चोदकर भी नहीं गिराया होगा । लेकिन साली चमेली ने कभी मौका ही नहीं दिया….. अभी तक मैं उसका हाथ नहीं पकड़ पाया…… लेकिन कल चोदूँगा साली को… लण्ड चूसा चूसा कर चोदूँगा…”, मालिक वासना के नशे में बडबडाता रहा, “ बढती उम्र के साथ साथ तुम्हारी मां की जवानी भी खिलती जा रही है… वो पहले कभी इतनी चुदासी नही दिखी..…जितनी अब दिखती है.” मालिक बिल्कुल जवान लौन्डो की तरह मस्ता गया था । 50 साल से ऊपर था और …… साल के लड़के के साथ चुदाई की बात कर रहा था । चिंटू मालिक की बहुओं के बारे में भी गंदी बाते करना चाह रहा था….इसलिए उसने पूछा, “ मालिकजी, अगर आपको मेरी बहनरानी, सीमा और आपकी दोनों बहुओं में से सिर्फ किसी एक को चोदनेका मौका दिया जाए , तो आप किसको चोदना चाहेंगे ?” मालिक गहरी सोंच में डूब गया । चिंटू को लगा की कहीं यह सुनकर शायद मालिक उसपर घुस्सा न हो जाये ।

लेकिन मालिक तो मन ही मन चारों लडकियों की तुलना करनेमें मशगुल था । थोड़ी देर सोचने के बाद उसने कहा, “ युं तो तुम्हारी बहन उम्र में सबसे छोटी होने की वजह से चुदाई का बहूत मजा देगी, लेकिन फिर भी मै अपनी छोटी बहु को, लीला को, चोदना पसंद करूँगा …. वो गजब की सुन्दर और चुस्त शरीर की मालकिन है….इसलिए चमेली के अलावा अगर मै किसी और के चूत में अपना लंड डालने के लिए बेक़रार हूँ तो वोह है मेरी छोटी बहु….लीला !” चिंटू:- “लेकिन मैं तो आपकी बेटी सीमा को चोदना चाहता हूँ….साली बहुत मस्त-मस्त माल है… क्या आपने कभी अपनी छोटी बहु को नंगा देखा है ? मालिकने इधर उधर देखा और कहा- “देखा तो नहीं है लेकिन देखना चाहता हूँ …” मालिकने चिंटू की पीठ थपथपाई और फिर से कहा, “मैंने लीला बहू को कपड़े बदलते हुए देखा है और चोरी चोरी कई बार कुतिया को खाली पेटीकोट और ब्रा में देखा है । क्या टाइट माल है ।

चमेली को पटाने के बाद उसे ही बोलूँगा की वो मेरी छोटी बहू को मेरा लण्ड खाने के लिए तैयार करे।

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…..समाप्त …..

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