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मैं और मेरे विद्यार्थीयो के साथ मस्त चुदाई !

मैं स्कूल में बायलोजी विषय की टीचर थी। 12वीं क्लास को पढ़ाती थी। मेरी क्लास में लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते थे। स्कूल में साड़ी पहनना जरूरी था। मैं दूसरी टीचर्स की तरह खूब मेक-अप करती और खूबसूरत साडियां पहनकर स्कूल आती थी,जैसे कोई स्पर्धा चल रही हो।

क्लास में मुझे देव बहुत ही अच्छा लगता था। वो 18 साल का एक सुंदर लड़का था, लंबा भी था, और हमेशा मुझे देखकर मुश्कुराता था, बल्कि खुश होता था। उसकी मतलबी मुश्कुराहट मुझे बैचैन कर देती थी। मुझे भी कभी-कभी लगता था कि देव मुझे अपनी बाँहों लेकर चूम ले।

देव ही आज की कहानी का नायक है।

हमेशा की तरह आज भी क्लास में मैं पढ़ा रही थी। मैंने विद्यार्थियों को एक सवाल का उत्तर लिखने को दिया। सवाल सरल था। सभी लिखने लगे, पर देव मुझे बार-बार देख रहा था। उसे देखकर आज मेरा मन भी मचल गया। मैं भी मुश्कुरा कर उसे निहारने लगी। वो मुझे लगातार देखता ही जा रहा था, कभी-कभी उसकी नजरें झुक भी जाती थी। मुझे लगा कि कुछ करना चाहिए। मैं घूमते हुए उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली- “देव कुछ मुश्किल है क्या?” और मैंने उसका कन्धा दबा दिया।

देव- “न… नहीं मैम…”

मैं उससे सट गई। उसके कंधे का स्पर्श मेरी जाँघों में हुआ तो मैं सिहर उठी। क्लास के बाद मैंने पेपर ले लिए। छुट्टी के समय मैंने देव को बुलाया और कहा- “मैंने तुम्हारा पेपर चेक कर लिया है। देव,तुम बायोलोजी में कमजोर हो। तुम्हें मदद की जरूरत हो तो घर पर आकर मुझसे पूछ सकते हो…”

देव- “जी मैम… मुझे जरूरत तो है पर आपका घर का पता नहीं मालूम है…”

मैं- “अगर तुम्हें आना हो तो 4:00 बजे शाम को आ जाना मेरा पता ये है…” मैंने अपने घर का पता एक कागज़ पर लिखकर देते हुए कहा।

देव- “जी थैंक्स…” देव के शरीर से एक तरह की खुशबू आ रही थी, जिसे मैं महसूस कर रही थी।

मैं- “देव तुम कहाँ रहते हो?”

उसने अपने घर का पता बताया। वो मेरे घर से काफी दूर था। शाम को वो 4:00 बजे से पहले ही आ गया। मैं उस समय लम्बी स्कर्ट और ढीले ढाले टाप में थी। मेरे बड़े और भारी स्तन उसमें से बाहर निकले पड़ रहे थे। तब मैं सोफे पर बैठी चाय पी रही थी।

मैंने उसे भी चाय पिलाई। फिर मैंने पूछा- “किताब लाये हो?”

उसने किताब खोली। मैं उसे पढ़ाने लगी। मैं सेंटर टेबल पर इस तरह झुकी थी कि वो मेरी चूचियां अच्छी तरह देख सके। ऐसा ही हुआ और उसकी नजरें मेरी चूचियों पर गड़ गयीं। मैंने काफी देर तक उसे अपनी चूचियां देखने दी। मुझे अब विश्वास हो गया कि वो गरम हो चुका है। मैंने तुंरत ही गरम-गरम लोहे पर चोट की- “देव… क्या देख रहे हो?”

वो बुरी तरह से झेंप गया। पर सँभलते हुए बोला- “नहीं, कुछ नहीं मैम…”

मैंने देखा तो उसका लण्ड खड़ा हो गया था। मैंने कहा- “मुझे पता है तुम कहां झांक रहे हो। तुम अपने घर में भी यही सब करते हो? अपनी माँ बहन को भी ऐसे ही देखते हो क्या? तुम्हें शर्म नहीं आती…”

वो घबरा गया- “मैम वोऽऽ… वोऽऽ… आई एम सारी…”

मैं- “सारी क्यों? तुम्हें जो दिखा, तुमने देखा। तुमने मेरा स्तन देखे,पर मेरा टाप तो उतारकर नहीं देखे हाथ नहीं लगाया फिर सारी किस बात की? मिठाई खुली पड़ी हो तो मक्खी तो आएगी ना। पर हाँ… सुनो किसी को कहना मत…”

देव- “नऽऽ… नहीं मैम, नहीं कहूँगा…”

मैंने धीरे से उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वो सिहर गया। पर वो कुछ बोला नहीं। मैं अब उसकी जांघ सहलाने लगी। मेरे अन्दर उत्तेजना अंगड़ाई लेने लगी। मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने धीरे से उसके लण्ड पर हाथ रख दिया।

वो मेरा हाथ हटाने लगा- “मैम ना करो ऐसे, गुदगुदी होती है…”

मैं- “अच्छा, कैसा लगता है?” मैंने अब उंगलियों से उसके लण्ड को ऊपर से पकड़कर दबाया।

देव- “मैम आह्ह… अह्ह… नहीं… मैम छोड़ो ना…”

मैं- “पहले बताओ कैसा लग रहा है?”

देव- “मैम… मीठी-मीठी सी गुदगुदी हो रही है…” और वो शरमा गया। उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया पर मेरा हाथ नहीं हटाया, बल्कि सोफे पर आगे सरक कर अपने लण्ड को और ऊपर उभार लिया।

मैं खुश हो गई। चलो अब रास्ता साफ है। मैंने जल्दी से उसकी पैन्ट की ज़िप खोली और उसका लण्ड बाहर खींच लिया। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मैं लण्ड को प्यार से आहिस्ता-आहिस्ता सहालाने, मसलने लगी। देव सीत्कारने लगा। उसने धीरे से अपनी आंखें खोलकर मुझे देखा। मैंने प्यार से उसके होठों को चूम लिया। अब उसके सब्र का बांध भी टूट गया। उसने मेरी चूचियां पकड़ ली और बुरी तरह वो मेरे टाप के ऊपर से ही मेरे चूचुक खींचने लगा। देव मेरे साथ निर्दयता से पेश आ रहा था।

मैं कराहने लगी- “देव… धीरे-धीरे देव…” मैंने उसका हाथ पकड़कर हटाना चाहा मगर उसने मुझे छोड़ा नहीं। उसका लण्ड फूलकर फटने को हो रहा था। मैंने लण्ड के सुपाड़े की चमड़ी ऊपर खींच दी और झुक कर लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। देव अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मेरे मुँह को चोदने लगा। उसका लण्ड बढ़ता ही जा रहा था। मेरी उससे चुदने की इच्छा भी बढ़ती जा रही थी।
मैं सोफे से उठी और देव को लेकर बिस्तर पर आ गई। जैसे ही मैंने अपना टाप उतारने के लिए अपने हाथ ऊपर किए, देव ने मेरी स्कर्ट नीचे सरका दी। ब्रा और पैन्टी तो मैंने पहले से ही नहीं पहनी थी। अब मैं अपने जन्म-रूप में थी और चुदने को बिल्कुल तैयार थी। मेरी चूत गीली हो चुकी थी।

मैंने देव से भी कपड़े उतारने को कहा। वो तो इसके लिए पहले से ही आतुर था, उसने फटाफट अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया।

मैंने उससे प्यार से पूछा- “देव… मुझे चोदोगे?”

देव- “हां मैम… लेट जाओ जल्दी से…”

अब मैंने उसे तड़पाने की सोची और कहा- “अगर मुझे चोदना है तो पहले मेरी गाण्ड चाटो…”और मैंने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाकर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। इससे मेरी गाण्ड का छेद उभरकर दिखने लगा। मैंने उसे अपनी गाण्ड की तरफ इशारा करके कहा- “चाटो… अपनी जीभ मेरी गाण्ड के छेद में घुसाओ…”

पर वो अपनी जगह से हिला नहीं और झिझकते हुए बोला- “नहीं मैम… मैं ये काम नहीं कर सकता, गंदा लगता है…”

मैं- “अरे चाटो ना, बहुत मज़ा आएगा मुझे…”

पर देव नहीं माना।

मैंने कहा- “ठीक है पर चूत तो चूसो, देखो कितनी पनीली हो रही है…”

देव- “नहीं मैम, मैं तो बस अपना लण्ड चूत में घुसाना चाहता हूं…”

मुझे गुस्सा आने लगा। लेकिन अपने गुस्से को काबू में करके मैंने उससे कहा- “साले पहले कोई चूत देखी भी है या नहीं? बस चूत में घुसाने की जिद लगा रखी है…” मैंने भी सोच लिया कि जब तक अपनी गाण्ड और चूत देव से चटवा नहीं लूंगी इसको चूत में नहीं डालने दूंगी।

मैंने कहा- “अच्छा मेरे पास आओ…”

उसने मेरी एक चूची को मुँह में ले लिया और दूसरी को हाथ से मसलने लगा। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और उँगलियों से उसके लण्ड को मसलने लगी। वो उत्तेजित हो उठा। मैंने खींचकर उसे अपने से चिपका लिया। मुझे पता था कि वो चोदना चाह रहा है। मैं उसके लण्ड की और तेजी से मुठ मारने लगी। वो सिस्कारियां भरता रहा। मुझे लगा कि वो अब जल्दी झड़ जाएगा, और उसी समय उसका वीर्य निकल पड़ा, वो अपनी उत्तेजना सम्भाल नहीं पाया। मुझे भी यही चहिए था। उसका लण्ड सिकुड़ गया और उसका वीर्य मेरे हाथ से टपक रहा था।

वो बोला- “मैम, ये क्या हो गया? अभी तो मैंने अन्दर भी नहीं डाला था…”

मैं- “अन्दर तो मैं तुझे तब तक नहीं डालने दूंगी जब तक तू मेरा कहा नहीं मानता। मेरी गाण्ड और चूत नहीं चूसेगा तो मैं भी चूत में नहीं डलवाऊँगी। ले अब चूस,चाट ले मेरी गाण्ड, इतनी देर में ये भी फिर तैयार हो जाएगा…” मैं उसके निढाल लौड़े को छेड़ते हुए बोली।

देव- “नहीं मैम, बहुत गंदी होती है ये, मुझे घिन आती है…”

मैं- “बहनचोद घिन आती है, गंदी है फिर क्यूं अपना लण्ड हाथ में लेकर इसके पीछे पड़ा है? अच्छा बता अब तक कितनी बार चुदाई की है? किस-किस को चोद चुका है?

देव- “मैम किसी को नहीं। एक बार भी नहीं…”

मैं- “अच्छा बताओ, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”

देव- “नहीं मैम, गर्लफ्रेंड नहीं, पर रंजना मुझे अच्छी लगती है…”

मैं- “अच्छा… और उसे तुम अच्छे लगते हो?”

देव- “हाँ मैम, मुझसे बात भी करती है और मुझे ललचाई नजरों से देखती है…”

मैं- “ठीक है… कल मैं उसको यहाँ बुलाती हूँ। या कल तुम उसे यहाँ ला सकते हो?”

देव- “मैम, ऐसे कैसे मैं ला सकता हूँ उसे? आप ही बुला लो यहाँ…”

मैं- वो चुद जाएगी तुमसे?

देव- “अगर आप हेल्प करोगी तो वो जरूर आ जायेगी और फिर देखेंगे क्या होता है? शायद चुद जाए…”

मैं- “ठीक है, उसे फिर खूब चोदना मेरे सामने…”

देव- “प्रोमिस मैम…”

मैं- “प्रोमिस…”

वो खुश हो गया और किताब उठाकर चला गया।

अगले दिन मैंने रंजना को देव के साथ आने को कह दिया। रंजना तुंरत तैयार हो गयी। मैं समझ गयी कि आग दोनों ओर लगी है। देव उसे अपनी मोटर साइकिल पर बैठाकर ले आया। देव और रंजना को मैंने पास-पास ही सोफे पर बैठाया। मैं चाय बनाकर ले आयी। मैंने देखा कि वो दोनों एक दूसरे की टांगों को स्पर्श करते हुए बैठे बात कर रहे थे।
मैं मुश्कुरा उठी।- “रंजना… देव तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहा था…”

देव ने तुंरत ही कहा- “मैम… मैं अभी आया…” वो उठकर बाहर चला गया।

रंजना ने कहा- “मैम… मुझे क्यों बुलाया है?”

मैं- “तुम्हें देव अच्छा लगता है?”

रंजना- “वो मेरे से कुछ बात ही नहीं करता है ज्यादा…”

मैं- “तुम उसे पसंद करती हो?”

वो शरमा गयी- “मैम वो मुझे अच्छा लगता है…”

वो भी तुम्हें चाहता है, उसी के कहने पर तुम्हें मैंने यहाँ बुलाया है, पर वो झिझकता है अपने प्यार का इजहार करने में। देखो अब भी उठकर दूसरे कमरे में चला गया, शरमा कर।
रंजना- “मैंने तो उसे कई बार संकेत दिए पर वो समझ ना सका…”

मैं- “ऐसी बात नहीं कि वो तुम्हारे इरादों से बेखबर है, वो डरता है और शरमाता भी है, वो तो कल मुझसे पढ़ने आया तो मैंने बातों-बातों में ऐसे ही पूछ लिया उससे कि कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? तो बहुत बार पूछने पर बताया कि तुम उसे अच्छी लगती हो तो मैंने उससे प्रोमिस किया कि मैं तुम दोनों की दोस्ती करा दूंगी…”

फिर मैंने कहा- “तो सुनो रंजना, तुम्हें मैं एक मौका देती हूँ। वो मेरे बेडरूम में है जाकर उसे जो कहना है कह दो ना…”

रंजना- “मैम… शर्म आयेगी मुझे भी। वो लड़का होकर भी नहीं कह सकता फिर मैं तो लड़की हूँ…”

मैं- “अच्छा… तो मैं तुम्हारा काम बनती हूँ… पर इसका टैक्स देना पड़ेगा…”

रंजना- “मैम बस एक बार हमारी दोस्ती करवा दो… फिर…”

मैं- “ओके… फिर क्या करोगी बता दो?” मैंने उसे रहस्यमई निगाहों से देखा।

रंजना- “मैम वो… कुछ खास नहीं बस… कुछ नहीं मैम…”

मैं- “कुछ तो… अगर वो तुम्हें किस करे तो, तो करने दोगी?”

रंजना- “मैम… आप भी बस…”

मैं- “बताओ ना?”

रंजना- “हाँ…”

मैं- और?

रंजना- और क्या?

मैं- “हाँ… हाँ बोलो और भी कुछ…”

रंजना- “मैम… आपको भी मज़ा आ रहा है यह सब पूछकर?”

मैं- “हाँ… बहुत मजा है इस सब में… अच्छा बताओ अगर देव तुम्हारे चूचियां पकड़ ले तो?”

रंजना- “मैम बस करो… आप तो बेशरम होती जा रही हो…”

मैं- “क्यूँ… इसमें ऐसी क्या बात है? क्या तुम्हारा मन नहीं करता कि कोई तुम्हें किस करे? तुम्हारे शरीर को मसल दे? इस उमर में यह सब करने की इच्छा होती है, मुझे तो बहुत होती है, तुम्हें भी जरूर होती होगी, है ना…”

रंजना- “हाँ मैम, पर डर लगता है किसी को पता चल गया तो?”

मैं- “यहाँ हमारे सिवा और कौन है? बस सारी बात हम तीनों के बीच ही रहेंगी…”

रंजना- “मैम कुछ होगा तो नहीं? मुझे डर लग रहा है और अब तो इच्छा भी बहुत जाग उठी है…”

मैं- “डरो मत… अन्दर बेडरूम में जाओ और कह दो देव से दिल कि बात। वो भी बेचैन है…”

रंजना- “नहीं मैम, आप उसे यहीं बुला लो,यहाँ आपके सामने ही, बल्कि आप ही कह दो सारी बात…”

मैं- “चलो यह काम अगर मैं करुँगी तो बाकी काम भी मैं ही कर लूंगी उसके साथ…”

रंजना- “मैम…”

मैं और मेरे विद्यार्थीयो के साथ मस्त चुदाई !

मैं- “अच्छा बुलाती हूँ…” यह कहकर मैंने देव को आवाज लगाकर बुलाया।

देव अपनी किताबें लेकर अन्दर आ गया। वो मुझसे कुछ पूछने लगा किताब में से।

मैंने उससे कहा- “ज्यादा नाटक मत करो और काम कि बात पर आओ। रंजना तुमसे कुछ कहना चाहती है…”

रंजना- “नहीं मैम, नहीं मैं क्या? मैंने तो कुछ नहीं कहना…”

मैं- “अब तुमने नौटंकी शुरू कर दी…”

“देव सुनो, रंजना मान गई है तुमसे दोस्ती के लिए, बल्कि ये तो पहले से ही चाहती थी तुम्हारी दोस्ती, बस तुम्हारे प्रोपोजल का इंतजार कर रही थी…” अब रंजना से बोलो- “आई लव यू…”

देव शरमाते और हकलाते हए बोला- “रंजना, आई लव यू…”

मैंने ताली बजाई और रंजना को बधाई दी और कहा- “अब तुम भी बोलो देव से…”

वो भी धीरे से बोली- “देव। आई लव यू…”

मैंने फिर ताली बजाई और देव को बधाई दी और कहा- “अब आगे बढ़ो और कुछ करो…”

दोनों एक साथ बोले- क्या?

मैं- “क्या-क्या? किस करो…”

दोनों मेरे मुँह की तरफ देखने लगे।

मैं- “हां… हां करो, करो किस एक दूसरे को…”

देव बोला- “मैम… नहीं मैम आपके सामने, आपके सामने नहीं…”

मैं- “मेरे सामने… क्या हुआ मेरे सामने? रंजना तुम उठो और देव को किस करो गाल पर…”

रंजना- “नहीं मैम मुझे नहीं आता किस करना…”

मैं- “नहीं आता तो सीख ले… ले देख किस कैसे करते हैं…” यह कहकर मैं देव के पास गई और पहले उसके गाल पे फिर उसके सिर के पीछे हाथ रखकर उसके होंठों पर जोरदार किस किया।

देव घबरा गया और रंजना मुझे ताकती रह गई।

मैं- “चल देव तू ही शुरू कर। पकड़ ले और चूस-चूस के लाल कर दे इसके गालों और होंठों को…” मैंने देव को रंजना का हाथ पकड़ाते हुए आदेश दिया।

देव ने डरते हुए रंजना को अपनी ओर खींचा और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसका चेहरा ताकने लगा जैसे उससे पर्मिशन मांग रहा हो।

मैंने उठकर दोनों के सिर पकड़कर उनके होंठों को आपस में मिला दिया। अब देव ने अपने होंठ खोले और रंजना के होंठों को किस करने लगा। अब मैं वहां से उठकर बाहर आ गई और दो चार मिनट इधर-उधर बेचैनी से टहलने के बाद फिर अन्दर झांक कर देखा तो देव रंजना को चूम रहा था और उसकी चूचियां सहला रहा था। मैं तुंरत अन्दर आ गयी।

रंजना एकदम से घबरा गयी।

मैं- “रंजना क्या हो गया? अरे करो, ये तो लड़की और लड़के के लिए जरूरी है…”

रंजना- “मैम सारी… सारी…”

मैं- “सच कह रही हूँ, अपना काम चालू रखो। कहो तो मैं मदद कर दूँ?”

रंजना शर्म से झुकी जा रही थी। देव ने उसका मुँह ऊपर उठाया और उसके होंठ फिर से चूमने लगा। रंजना ने अपनी आँखें बंद कर ली। देव ने उसे धीरे से मेरे बिस्तर पर लेटा दिया और अपने कपड़े उतारने लगा। फिर रंजना के कपड़े उतारने लगा। रंजना ने मुझे मुझसे परमिशन मांगने की नजरों से देखा।

मैंने खुद ही उसका टाप उतार दिया और कहा- “मस्ती करो, शरम नहीं…”

देव ने उसकी जीन्स भी उतार दी, एक नंगी जवान 18 साल की लड़की देचककर देव का लण्ड फूलकर कड़ा हो गया। वो बिस्तर पर उससे लिपट गया।

मैं- “अरे ये क्या कर रहे हो? इसकी इजाजत नहीं है…”

“प्लीज मैम…” दोनों ने मेरी ओर देखा।

मैं- “नहीं… बिल्कुल नहीं। तुम दोनों अकेले कैसे मज़ा ले लोगे, मैं कहां जाऊँगी?” कहकर मैं भी अपने कपड़े उतारने लगी।

देव ने मुझे कपड़े उतारते देखा तो बोला- “मैम, तो पहले आप…”

मैंने रंजना के कान में अपनी बात बताई।

वो हँसने लगी- “हाँ मैम, फिर तो आज इसकी खैर नहीं…”

मैं- “हाँ देव… पर मेरी शर्त याद है ना… मेरी गाण्ड चाटकर मुझे मस्त कर दो…”

रंजना- “हाँ मैं भी देखूं कि मैम की गाण्ड कैसे चाटता है तू, फिर मैं भी करवाऊँगी वैसे ही…”

देव- “नहीं… नहीं, मैं नहीं करूंगा। मैं नहीं चाट सकता गाण्ड…”

मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और उसके गाल पर एक चांटा जड़ दिया।

वो आश्चर्य से मुझे देखने लगा।

मैंने फिर उसे कहा- “हरामजादे… बोल चाटेगा की नहीं?” फिर मैं उसके चूतड़ों पर लात मारते हुए बोली- “पहले मेरी चूत चाट फिर गाण्ड…”

रंजना- “मैम, ये ऐसे नहीं मानेगा। ये लो, इसे बाँध दो…” रंजना बोली।

हम दोनों ने उसे बिस्तर पर लेटाकर बाँध दिया। रंजना ने उसके लण्ड को पकड़कर मसलना चालू कर दिया। मैं देव पर चढ़ गयी। चूत को उसके मुँह से सटाकर बोली- “अब चूसो इसे…” और मैं अपनी चूत उसके मुँह पर धीरे-धीरे रगड़ने लगी।

देव- “नहीं मैम… नहीं, मुझे छोड़ दो मैम…”

मैं- “देव, चुपचाप मेरी बात मानो…” मैंने अपनी गीली चूत उसके होंठों पर घिसनी चालू कर दी।

वो इधर-उधर होने लगा। उसके मुँह पर मेरी चूत की चिकनाई फैल गयी थी।

मैं- “चल न, चाट ले रे चूत को, ज्यादा हरामीपना मत दिखा…”

देव- “मैम क्या कर रही हो?”

मैं- “चल चूस इसे मादरचोद, स्कूल में तो मेरी चूचियां खूब देखता था, अब चूस इसे कुत्ते…”

उसने हार मान ली और चुपचाप चूसने लगा।

मैंने कहा- “शाबाश बेटा आआह्ह… और अब देख बहनचोद, इसके बाद मेरी गाण्ड का नम्बर है… और रंजना… चल साली तू देव का लण्ड चूस…”

रंजना उसके लण्ड को अपने मुँह लेकर चूसने लगी।

मैंने अपने चूतड़ों की फ़ांकों को खोलकर उसके मुँह पर रख दिया। उसने हिम्मत करके अपनी जीभ निकालकर मेरी गाण्ड के छेद में डाल दी।

मैं खुशी से झूम उठी। मेरी तरकीब काम आ गयी थी। मैं अपनी गाण्ड उसके मुँह पर पटकने लगी- “ले चाट इसे बहन के लोड़े…” मैं उसका लण्ड पकड़कर मुठ मारने लगी तो उसे भी मजा आने लगा।

रंजना कहने लगी- “मैम, ये लण्ड तो मेरे लिए छोड़ दो ना प्लीज़…”

मुझे सू-सू आने लगी थी। मैंने अपनी गाण्ड ऊँची की और उसके मुँह में पेशाब की धार छोड़ दी। उसने अपना मुँह बंद कर लिया, आँखें भी बंद कर लीं। मैं अब उसके पूरे शरीर पर पेशाब करने लगी, वो पूरा भीग गया।

रंजना भी उत्तेजित हो चुकी थी- “मैम थोड़ा इधर भी…” रंजना मेरी चूत के पास आ गयी और अपना मुँह खोल दिया।

मैंने अपनी धार रंजना के मुँह की तरफ कर दी। उसने अपना मुँह पूरा पेशाब से भिगा लिया और अपना मुँह खोल लिया। अब धार उसके मुँह में जा रही थी। वो पेशाब अपने मुँह में भरकर एक घूंट में पी गयी। अब पेशाब मैं कर चुकी थी। रंजना ने मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी।

रंजना बोली- “देव, देखो कैसा मजा आया ना?”

रंजना ने फिर कहा “मैम मजा आ गया… अब मैं भी मूतने की कोशिश करती हूँ…” और रंजना देव के ऊपर चढ़कर मुझसे लिपट गयी और अपनी धार छोड़ दी।

उसकी गरम-गरम धार मेरे शरीर पर भी आ रही थी। मैंने अपनी गाण्ड थोड़ी और ऊँची कर दी। जगह हो गयी थी। अब रंजना के पेशाब की धार देव के मुँह पर पड़ रही थी। मैंने भी तुरंत हाथ में उसका पेशाब भर लिया और मुँह में डालकर पी गयी। खारा-खारा सा स्वाद लगा। पर उत्तेजना में उसमें भी स्वाद आया।

देव- “भोसड़ी की… तूने ये क्या किया? तेरी तो मैं माँ चोद दूंगा…”

रंजना- “मेरे प्यारे देव, मेरी मां बाद में चोदना, पहले मेरी गाण्ड चाट ले…” रंजना ने अपनी गाण्ड के छेद को उसके मुँह पर रख दिया और देव के लण्ड को मुठ मारने लगी।

मैं- “मजा आया हरामी गाण्ड चाटकर…” मैंने उसका मुँह सीधा करके रंजना की गाण्ड में घुसा दिया। उसे चाटना ही पड़ा।

देव- “चुदक्कड़ रांड अब तो छोड़ दे मुझे, तुझे कुत्ते चोदें… रंडी…”

मैं- “हाँ… हाँ बोल, इतना मोटे लण्ड से क्या अपनी बहन को चोदेगा? हरामी चल चाट तेरी इस चुदक्कड़ रांड की गाण्ड को…”

रंजना- “हाँ मेरे राजा, चाट ले ना मेरी गाण्ड को… फिर तू मुझे घोड़े की तरह से चोदना…” फिर वो भी गाण्ड को आगे पीछे करके गाण्ड रगड़ने लगी।

मेरी इच्छा पूरी हो गयी थी। रंजना ने भी पूरी कसर निकाल ली और उसपर से उतर गयी। रंजना मेरे से लिपट गयी। उसकी चूचियां मेरी चूचियों से टकरा गयीं। दोनों ने एक दूसरे की चूचियां दबाई और देव को खोल दिया।

देव ने कहा- “मैम, आपको तो मजा आ गया ना? अब मेरी बारी है ना…” उसने बिस्तर पर से हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पकड़ ली। उसने मुझे दबोच लिया और बिस्तर पर पटकते हुए बोला- “चल बहन की लौड़ी, घोड़ी बन जा…” उसने मेरी चूचियां भींच डाली। मुझे घोड़ी बनाकर उसने मेरे चूतड़ों पर कस-कस के मारना शुरू कर दिया।

मैं- “देव, मत मार मुझे बहनचोद, कुत्ते, अपनी माँ को मारना, घर जाकर उसकी गाण्ड की पिटाई करना…” मैं गलियां देती हुई घोड़ी बन गयी। उसने मेरे चूतड़ की दोनों फांकों को चीरते हुए अपने लण्ड की सुपाड़ी गाण्ड के छेद में टिका दी।

“ले कुतिया, अब तेरी गाण्ड की माँ चोद दूंगा…” कहते हुए उसने मेरी गाण्ड में अपना 18 साल का जवान लण्ड चीरता हुआ अन्दर तक घुसा दिया।

मैं चीख उठी। उसने फिर गाण्ड फाड़ देने वाला धक्का लगाया, मैं फिर चीख उठी। उसके धक्के बढ़ते गए, मैं चीखती रह गयी।

रंजना- “देव छोड़ दे मैम को, जल्दी कर ना… फिर मेरी बारी भी तो है…”

मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था- “हरामजादे बस कर अब, मेरी गाण्ड फट गई है…”

देव- “साली रंडी, तू क्या समझती है, तुझे छोड़ दूंगा। ये देख खून तो निकल रहा है पर अभी और खून निकालूंगा… तुने मेरे ऊपर पेशाब किया है ना…” देव ने अपना लण्ड तुरंत बाहर निकाला और जोर लगाया। फिए एक झटके से लण्ड को मेरी गाण्ड में पेल दिया।

मैं- “कुत्ते, हरामी, मर जाऊँगी, छोड़ दे मुझे, लण्ड को निकाल ले अब…”

पर उसने अनसुनी कर दी और धक्के बढ़ते गए। मेरे हाथ में अब कुछ नहीं था। मैंने अब अपने को देव के हवाले कर दिया था। अब दर्द कम हो गया था। पर झटके बेरहमी से मार रहा था। अब उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और चूत के द्वार पर रख दिया। देव ने धक्का मारते हुए लण्ड सीधा चूत में घुसा दिया। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के खून से लथपथ था। बिस्तर पर खून गिरा था। चूत में लौड़े के घुसते ही फिर मेरी आह्ह निकल पड़ी। उसके लण्ड ने सीधे जड़ में चोट की थी।

मैं दर्द से तड़प उठी। दूसरा धक्का तो और भयंकर था। तेज़ दर्द से मैं लगभग रोते हुए बोली- “देव प्लीज़, अब छोड़ दे… मैं मर जाऊँगी…” तभी एक और तेज़ धक्का लगा। मुझे लगा मैं बेहोश हो जाऊँगी- “देव बस… अब नहीं, देव नहीं…”

उसने अब नरमी दिखाई, वो आराम से धक्के लगाने लगा। मुझे भी अब धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। देव चरम सीमा पर पहुंचने लगा था। मैं चुपचाप लेटी थी। मज़ा बढ़ता जा रहा था। अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूं तो मुझे ज्यादा मज़ा आने लगा।

मैंने भी गालियां देनी शुरू कर दी- “लगा जोर हरामी, चोद दे मुझे, जोर लगा रे, दे लण्ड चूत में, हाय उईईइ सी… सी… मादरचोद दे धक्के, मर गयी…” और मेरा रस निकलने लगा। उसके धक्कों से मेरा पूरा शरीर हिल रहा था। मैं निढाल हो गयी। पर अभी भी उसके धक्के चालू थे। मेरी चूत में अब जलन बढ़ने लगी। गाण्ड भयंकर दर्द कर रही थी। चूत का भी बुरा हाल था। चूत के अन्दर तो जैसे आग लग रही थी।

मैंने बिनती की- “देव अब छोड़ दे मुझे, प्लीज छोड़ दे मुझे…” पर शायद मेरी आवाज मुँह से नहीं निकल पा रही थी।

देव ने मुझे छोड़ दिया और रंजना को पकड़ लिया।

रंजना- “प्लीज देव, धीरे करना…”

देव ने रंजना को चूमा और उसे मेरे पास बिस्तर पर लेटा दिया। बिस्तर गीला हो चुका था। रंजना को अपनी चूत में लण्ड घुसता महसूस हुआ। उसके मुँह से आह्ह निकल गई।

मैं निढाल सी लेटी थी। देव को देखा, उसके चोदने की ताकत कमाल की थी। रंजना खूब उछल-उछलकर चुदवा रही थी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर धीरे से उठी तो मैंने देखा कि बिस्तर खून से लाल था। मेरी चूत और गाण्ड से खून की कुछ बूंदें टपकी थीं। मुझे ठीक से चलने में परेशानी हो रही थी। मैं बाथरूम में गयी। अच्छी तरह से नहा धोकर वापिस आई तो देव और रंजना दोनों गीले बिस्तर पर चित्त लेटे थे। वो झड़ कर निपट चुके थे। देव के लण्ड की चमड़ी ऊपर से कुछ कट सी गई थी। रंजना और देव एक साथ उठे और बाथरूम में इकट्ठे घुस गए।

जब वो लोग नहाकर बाहर आए तो देव की नज़र बिस्तर पर पड़ी, तो वो घबरा गया- “मैम, ये क्या हो गया? इतना खून?”

मैं- “देव तूने आज मेरी जान ही निकाल दी…”

देव तुरन्त रुई और पट्टी लाया। उसने मेरी टांगें ऊँची की और रुई पानी से मेरी चूत और गाण्ड को अच्छी तरह से पोंछा।

मैंने उससे कहा- “वहां से दवाई उठाकर मेरे अन्दर दोनों जगह लगा दे…”

देव उंगली पर दवाई लेकर मेरी चूत के अन्दर और गाण्ड के छेद में लगाने लगा। लेकिन ये क्या? मेरी चूचियां फिर से खड़ी होने लगीं। मुझे चूत में मीठी सी जलन होने लगी। मैंने अपने आपको रोका और उसके लण्ड पर भी मैंने दवाई लगा दी।

देव- “मैम… आई एम सोरी, सोरी मैम…”

मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी चुदाई से मैं गहराई तक सन्तुष्ट हो गयी।

रंजना भी मुझसे लिपट गई- “देव, तू तो ही-मैन है रे… मज़ा आ गया…”

मैंने उसे चूमते हुए कहा- “कल जब पढ़ने आओ तो फिर से ऐसे ही चोदना…”

वो हैरान होकर मुझे देखने लगा। मैंने उसे धीरे से आंख मारी।

रंजना हँस पड़ी और पूछने लगी- “मैम… मैं भी कल पढ़ने आऊँ?”

*****  समाप्त *****

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