Hindi Chudai

चुदाई भरा गजब सुहाना सफर !

पलक और उनके पति मोहित दिल्ली में रहते थे,मोहित रेल्वे में नौकरी करते थे लेकिन उनका ताबदला इन्दौर हो गया था तो वे अपना कुछ सामान इन्दौर लेकर जा रहे थे, वैसे तो काफी सामान उन्होंने छोटे ट्रक से भेज दिया था पर कांच की कुछ चीज़ें, क्राकरी आदि अपनी कार से लेकर जा रहे थे।

जतिन नाम का एक युवक उनके पड़ोस में ही रहता था। सामान कुछ ज़्यादा था इसलिये मोहित ने जतिन को भी साथ चलने को कहा ताकि वहाँ जाकर सामान गाड़ी से उतारकर रखवाने में ज़्यादा दिक्कत ना हो। रविवार का दिन होने के कारण जतिन के कालेज की छुट्टी थी और वैसे भी जतिन पलक भाभी का कहा हुआ कभी नहीं टालता था। उनका बात करने का तरीका ही इतना लुभावना था कि जब भी वो प्यार से कोई भी काम कहती, जतिन मना ना कर पाता था।
सितम्बर का महीना था। जतिन की पूरी सुबह पलक भाभी और उनके पति मोहित का सामान उनकी गाड़ी में रखवाने में निकल गई थी। मोहित और पलक की शादी को अभी ढाई साल ही हुए थे, अभी तक उनके कोई बच्चा नहीं हुआ है।

पलक भाभी बला की खूबसूरत हैं,उनका गोरा रंग,नीली आँखें,गदराया बदन और गुलाबी होंठ किसी भी उम्र के मर्द को पागल कर दें और फिर जतिन तो एकदम युवा है, सिर्फ़ उन्नीस साल का,उसपर पलक भाभी का जादू चलना लाज़मी था। वो जतिन के पड़ोस में दो सालों से रह रही थीं, इतने समय में जतिन और पलक भाभी काफी घुलमिल गए थे। जतिन तो पहले दिन से ही पलक भाभी के हुश्न का दीवाना था। उस दिन सुबह से ही जतिन, पलक भाभी और उनके पति गाड़ी में सामान रखते-रखते पशीने से लथपथ हो चुके थे। गाड़ी सामान से लगभग भर ही चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे सारा सामान रखने के बाद किसी और के बैठने की जगह ही नहीं बचेगी। तभी मोहित घर के अन्दर गए ताकि आखिरी बचा हुआ सामान ला सकें। जतिन और पलक भाभी ने जैसे ही उन्हें घर से बाहर आने की आहट सुनी तो मुड़कर देखा तो दोनों हैरान रह गये। मोहित अपना 42 इंच का टीवी उठाए आ रहे थे।

“अब इस टीवी को कहाँ रखेंगे?” जतिन ने पलक भाभी को बोलते सुना।

“मुझे नहीं पता, पर इसके बिना मेरा काम नहीं चलने वाला। इसे तो मैं लेकर ही जाऊँगा। थोड़ा बहुत सामान इधर-उधर खिसका कर जगह बन ही जायेगी…” मोहित बोले।

जतिन ने पिछली सीट पर देखा और कहा- पीछे तो जगह नहीं है। मेरे ख्याल से आगे वाली सीट पर ही रखना पड़ेगा?

“अच्छा? तो फिर तुम्हारी भाभी कहाँ बैठेंगी?” मोहित बोले।

उनके चेहरे से लग रहा था जैसे वो गहन चिंतन में डूबे हुए हैं और कोई न कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने टीवी आगे वाली सीट को लेटाकर इस तरह से रखा कि आधा टीवी आगे ड्राईवर के साथ वाली सीट पर और आधा ड्राईवर के ठीक पीछे वाली सीट पर आ गया। फिर जतिन से पीछे वाली सीट पर बैठने को कहा। जतिन के बैठते ही उन्होंने पलक भाभी को भी जतिन के साथ बैठने को कहा और गाड़ी का दरवाज़ा बन्द करने की कोशिश करने लगे पर काफी कोशिश करने के बाद भी दरवाज़ा बन्द नहीं हुआ।

भाभी कहने को मोटी तो नहीं थी पर जगह ही इतनी कम थी कि किसी भी हालत में दो जने वहाँ नहीं बैठ सकते थे। भाभी ने अपने पति को समझाने की कोशिश की- एक काम करते हैं, आज टीवी यहीं छोड़ दीजिये। आप जब अगली बार जायेंगे तो ले जाना।

“बिल्कुल भी नहीं… कल से क्रिकेट के मैच शुरू हो रहे हैं, मेरा काम नहीं चलने वाला टीवी के बिना वो बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थे।

भाभी पहले ही गर्मी से परेशान थीं, उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई देने लगा था, उन्होंने झल्ला कर कहा- देखिये, फटाफट फैसला कीजिए, इतनी कम जगह में दो लोग नहीं आ सकते या तो आप अपना टीवी छोड़ दीजिये या फिर जतिन को मेरी गोद में बैठना पड़ेगा और मुझे नहीं लगता कि मैं जतिन का वज़न झेल पाऊँगी।

 

 

इतना सुनते ही उनके पति ने झट से कहा- अरे हाँ। यह तो मैंने सोचा ही नहीं था। एक काम करो तुम जतिन की गोद में बैठ जाओ। वैसे भी तुम हल्की सी ही तो हो, जतिन को ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी। रास्ता भी इतना लम्बा नहीं है,बस कुछ घण्टों की तो बात है।

मोहित जतिन को बच्चा ही समझते थे,इसलिए उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं थी कि उनकी बीवी जतिन की गोद में बैठे।

“आपका दिमाग तो ठीक है? इतनी गर्मी में यह परेशान हो जायेगा…” भाभी ने अपने पति को गुस्से से घूरते हुए कहा।

“कोई दिक्कत नहीं है भाभी। वैसे भी रास्ता इतना लम्बा नहीं है और ऊपर से दूसरा कोई तरीका नहीं है…” जतिन ने कहा।

तभी मोहित भी बोले- सही बात है पलक,मान जाओ ना?

पलक भाभी के पास मोहित की बात मान लेने के सिवा कोई चारा नहीं था, उन्होंने कहा- चलो ठीक है। अगर जतिन को दिक्कत नहीं है तो ऐसे ही कर लेते हैं। लेकिन अगर रास्ते में जतिन को दिक्कत हुई तो थोड़ी देर गाड़ी रोक लेंगे।

भाभी ने जतिन की ओर देखा तो उसने “हाँ…” में सिर हिला दिया।

भाभी ने कहा- तो ठीक है। चलो सब नहा लेते हैं, गर्मी बहुत है। फिर चलेंगे।

जतिन अपने घर गया और फटाफट नहा-धोकर वापिस आ गया। रास्ता साढ़े तीन से चार घण्टे का था और काफी गर्मी होने वाली थी इसलिए जतिन ने थोड़े आरामदायक कपड़े पहनने का फैसला किया और अपनी टी-शर्ट और निकर ही पहन ली।

पलक और मोहित भी थोड़ी देर में तैयार होकर आ गए।

भाभी ने भी गर्मी को ध्यान में रखते हुए एक पतला सा कुर्ता और सलवार ही पहनी थी। मोहित ड्राईवर सीट पर बैठ गए और जतिन पीछे की सीट पर बैठ गया। भाभी भी पीछे वाली सीट पर जतिन की गोद में बैठ गई और गाड़ी का दरवाज़ा बन्द कर दिया।

“तुम ठीक से बैठे हो ना?” भाभी ने जतिन से पूछा।

“जी भाभी, आप चिन्ता मत करो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। आप तो एकदम हल्की सी हैं…” जतिन ने जवाब दिया तो भाभी मुश्कुराए बिना न रह सकी।

तभी उन्होंने अपने पति को चलने को कहा। उनके पति को सिर्फ़ उनका सिर ही दिखाई दे रहा था क्योंकी सारी जगह उनके टीवी ने घेर रखी थी।

“तुम ठीक से बैठी हो ना?” उनके पति ने पूछा।

भाभी अपनी जगह पर थोड़ा हिली और बोली- हाँ। एकदम ठीक हूँ।

गाड़ी चल पड़ी और चलते ही मोहित ने गाने चला दिये। सफर लम्बा था। करीब एक घण्टा बीत गया था और गाड़ी अपनी पूरी रफ़्तार से चली जा रही थी।

पलक आराम से बैठी गाने सुन रही थी कि तभी उन्हें अपने नीचे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ। उन्होंने खुद को थोड़ा हिलाकर ठीक करने की कोशिश की पर अभी भी उन्हें कुछ चुभ रहा था। वो थोड़ा ऊपर उठी और फिर ठीक से बैठ गई, पर अभी भी पलक को अपने नीचे कुछ महसूस हो रहा था। जतिन साँस रोके चुपचाप बैठा था कि अब तो भाभी को पता लग ही जायेगा कि क्या हो रहा है।
“मैं जब बैठी थी तब तो यहाँ ऐसा कुछ नहीं था तो अब कहाँ से…” पलक खुद से बातें कर रही थी और तभी अचानक से उन्हें अंदाज़ा हुआ कि वह चुभने वाली चीज़ क्या है।
पलक के गोद में बैठने के कारण जतिन के लण्ड में तनाव आ रहा था और वही पलक की गाण्ड की दरार में चुभ रहा था।

जतिन का लण्ड मेरे बैठने के कारण खड़ा हो गया है…” पलक ने मन ही मन सोचा- “मुझे उम्मीद नहीं थी कि आज भी मेरी वजह से किसी जवान लड़के का लण्ड खड़ा हो सकता है। कितना बड़ा होगा जतिन का लण्ड? क्या सोच रहा होगा वह मेरे बारे में मन ही मन? क्या उसे भी मेरे चूतड़ों के बीच की खाईं महसूस हो रही है?” पलक का मन ऐसे रोमांचक सवालों से प्रफुल्लित हो उठा था।

पलक ने नीचे कि ओर देखा तो उनका कुर्ता भी खिसक कर ऊपर उठ गया था और उनकी नाभि साफ दिखाई दे रही थी। एक बार तो पलक ने सोचा कि कुर्ता नीचे कर लिया जाये, पर फिर पलक ने जतिन को थोड़ा तंग करने के इरादे से उसे वैसा ही रहने दिया। पलक को यह विचार बड़ा रोमांचित कर रहा था कि उनकी वजह से जतिन उत्तेजित हो रहा है।

जतिन के हाथ उनके दोनों तरफ सीट पर टिके हुए थे। चलते-चलते एक घण्टे से ज़्यादा हो चुका था, पर अभी भी कम से कम दो ढाई घण्टे का सफर बाकी था।

पलक जानती थी कि मोहित को उनके सिर के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था कि नीचे क्या हो रहा है। उनके टीवी के आड़ में सब कुछ छुपा हुआ था। तभी पलक ने महसूस किया कि जतिन थोड़ा उठकर अपने आपको व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही जतिन दोबारा बैठा तो उसका लण्ड ठीक भाभी के चूतड़ों के बीच में आ गया। पलक का मन इस एहसास से और भी रोमांचित हो उठा और वो मन ही मन कामना करने लगी कि जतिन कुछ ना कुछ और करे।

“तुम ठीक से बैठे हो ना जतिन?” पलक ने पूछा।

“हाँ भाभी। मैं तो एकदम ठीक हूँ। आपको तो कोई दिक्कत नहीं हो रही ना?” जतिन ने इस उम्मीद में पूछा कि अगर भाभी को उसके लण्ड की वजह से कोई दिक्कत होगी तो वो इशारों में कुछ कहेंगी।

लेकिन पलक ने कहा- “बिल्कुल नहीं। बल्कि मुझे तो अच्छा ही महसूस हो रहा है ऐसे बैठकर। तुम्हारे दोनों हाथ एक ही जगह रखे-रखे थक तो नहीं गए ना?”

जतिन को भरोसा नहीं हो रहा था कि भाभी ने सच में वो सब कहा है, उसने जवाब दिया- हाँ भाभी, थोड़ा सा।

“एक काम करो, तुम अपने दोनों हाथ यहाँ रख लो…” कहकर पलक ने जतिन के दोनों हाथ अपनी दोनों जांघों पर रखवा लिये। और पूछा- “अब ठीक है?”

“हाँ, अब तो पहले से बहुत बेहतर है…” जतिन ने खुश होकर कहा।

पलक ने नीचे की ओर देखा तो पाया कि जतिन ने अपनी दोनों हथेलियां उनकी दोनों जांघों पर रख ली थी और उसके दोनों अँगूठे पलक की चूत के बहुत पास थे। पलक मन में सोचने लगी के अगर जतिन थोड़ा सा भी अपने अँगूठों को अन्दर की ओर बढ़ाए तो उनकी चूत को सलवार के ऊपर से छू सकता है, पर पलक जानती थी कि जतिन इतनी आसानी से इतनी हिम्मत नहीं करने वाला।

जतिन की छुअन से पलक की चूत से रस निकलने लगा था और उनकी पैंटी भीगने लगी थी, उन्हें लग रहा था कि थोड़ी ही देर में यह गीलापन उनकी सलवार तक पहुँच जायेगा और तब अगर जतिन ने उसे छू लिया तो वह समझ जायेगा भाभी के मन में क्या चल रहा है और वो कितनी गर्म हो चुकी हैं। पलक ने खुद ही हिम्मत करके बात आगे बढ़ाने की सोची और अपने दोनों हाथ जतिन के हाथों पर रख लिये।

देखने में भाभी की यह हरकत बड़ी ही स्वाभाविक सी लग रही थी। फिर उन्होंने जतिन के हाथों को ऊपर से धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। पलक ने एक बार सिर उठाकर अपने पति की ओर देखा। अपने पति के इतनी पास होते हुए जतिन के साथ ऐसी हरकतें करना उन्हें बड़ा ही रोमांचित कर रहा था। पलक ने जतिन के हाथों को मसलते-मसलते उन्हें धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसकाने की कोशिश की ताकि जतिन के हाथों को अपने चूत के ठीक ऊपर ला सके। जतिन भी अब तक समझ चुका था कि भाभी क्या चाह रही हैं, वह खुद भी वासना से भरकर पागल हुआ जा रहा था।

पलक ने नीचे की ओर देखा तो जतिन अपने दोनों हाथ भाभी की टाँगों के ठीक बीच में ले आया था और अपने दोनों अँगूठों से भाभी की चूत को उनकी सलवार के ऊपर से हल्के-हल्के सहलाने लगा था। पलक ने जतिन का एक हाथ पकड़कर अपनी चूत के बिल्कुल ऊपर रख लिया और अपनी टाँगों को थोड़ा और चौड़ा कर लिया जिससे जतिन अच्छे से भाभी की चूत को उनकी गीली हो चुकी सलवार और पैंटी के ऊपर से सहला पा रहा था। पलक ने जतिन का हाथ पकड़कर जोर से अपनी चूत पर दबा दिया तो जतिन ने भी भाभी की चूत को थोड़ा और जोर से रगड़ना शुरू कर दिया। अब पलक भी वासना की आग में बुरी तरह जल रही थी,उन्होंने अपने हाथ जतिन के हाथों के ऊपर से हटा लिए थे पर जतिन ने अपने हाथ वहीं रखे और भाभी की चूत को रगड़ना बन्द कर दिया।

पलक बेसब्री से इंतज़ार करने लगी कि जतिन कुछ करे, पर शायद जतिन आगे बढ़ने में अभी भी डर रहा था। लेकिन पलक जानती थी कि उसका डर कैसे दूर करना है, पलक ने जतिन का एक हाथ पकड़ा और उसे उठाकर अपने पेट पर अपनी सलवार के नाड़े के ठीक ऊपर रख दिया और उसके हाथ को दबा दिया और दूसरे हाथ से अपना नाड़ा खोलने लगी। नाड़ा खोलते ही पलक ने जतिन का हाथ अपनी सलवार के अंदर की ओर कर दिया जिससे जतिन का हाथ भाभी की बुरी तरह भीग चुकी पैंटी पर आ गया। जतिन ने भाभी की चूत को गीली पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया। वह अब भाभी की चूत की फ़ाँकों को अच्छे से महसूस कर सकता था। पलक ने थोड़ी देर तक तो उसी तरह जतिन के हाथ का मज़ा लियाफि र उसे पकड़कर अपनी पैंटी की इलास्टिक की तरफ लेजाकर उसके अन्दर की ओर धकेल दिया। भाभी की पैंटी जतिन और भाभी दोनों के हाथों के लिए बहुत छोटी थी इसलिए पलक ने अपना हाथ बाहर ही रखा और सिर्फ़ जतिन के हाथ को ही आगे बढ़ने दिया।

नाड़ा खोलते ही पलक ने जतिन का हाथ अपनी सलवार के अंदर की ओर कर दिया जिससे जतिन का हाथ भाभी की बुरी तरह भीग चुकी पैंटी पर आ गया। जतिन ने भाभी की चूत को गीली पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया। वह अब भाभी की चूत की फ़ाँकों को अच्छे से महसूस कर सकता था। पलक ने थोड़ी देर तक तो उसी तरह जतिन के हाथ का मज़ा लिया, फिर उसे पकड़कर अपनी पैंटी की इलास्टिक की तरफ लेजाकर उसके अन्दर की ओर धकेल दिया। भाभी की पैंटी जतिन और भाभी दोनों के हाथों के लिए बहुत छोटी थी, इसलिए पलक ने अपना हाथ बाहर ही रखा और सिर्फ़ जतिन के हाथ को ही आगे बढ़ने दिया।

जतिन ने भाभी की चूत के होंठों को पहली बार छुआ तो उसके पूरे शरीर में गर्मी सी आती हुई महसूस हुई। जतिन ने भाभी की चूत की दोनों फ़ाँकों के ठीक बीच में अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया तो पलक के मुख से जोर की सिसकारी निकल गई पर गाड़ी के शोर में और गानों की आवाज़ में पलक की आवाज़ दब कर रह गई।

पलक की चूत एकदम गर्म होकर तप रही थी और पूरी तरह से भीगकर चिकनी हो चुकी थी। तभी पलक ने अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठाए और अपनी पैंटी की इलास्टिक के दोनों ओर अपने दोनों हाथों के अँगूठे फ़ंसाकर उसे नीचे की ओर खिसका दिया जिससे उनकी पैंटी और साथ ही उनकी सलवार उनके घुटनों तक नीचे खिसक गई।

पलक के ऐसा करते ही जतिन ने एक बार भाभी के चूतड़ सहलाए और फिर अपने दूसरे हाथ की उंगली भाभी की चूत में घुसा दी और उसे धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा, पर पैंटी के कारण पलक की टाँगें ज़्यादा खुल नहीं पा रही थी इसलिए पलक अपनी पैंटी पूरी तरह उतारने के लिए थोड़ा नीचे झुकने ही लगी थी कि जतिन ने अपने दूसरे हाथ से उनकी पैंटी को पकड़कर नीचे की ओर खींच दिया जिससे वो भाभी के टखनों तक आ गई तभी पलक ने अपने पाँव ऊपर उठाए ताकि जतिन उन्हें पूरी तरह निकाल दे। जतिन ने भाभी की पैंटी के साथ-साथ उनकी सलवार भी खींचकर नीचे उतार दी। अब पलक ने आराम से अपनी टाँगें पूरी खोल ली थीं जितना वो खोल सकतीं थीं।

जतिन को तो जैसे इसी मौके का इंतज़ार था उसने तुरन्त अपनी दो उंगलियां भाभी की चूत में घुसा दीं।

पलक के मुँह से हल्की सी “आह…” निकल गई।

“तुम ठीक तो हो ना?” अचानक मोहित ने पूछा। वो पलक के चेहरे को ही देख रहे थे।

पलक मुश्कुराई और बोली- मैं तो एकदम ठीक हूँ। मुझे लगा था जतिन की गोद में बैठने से दिक्कत होगी पर ऐसा कुछ भी नहीं है। मुझे लगता है यह सफर काफी अच्छा जाने वाला है। पलक अपने पति से बड़े आराम से बात कर रही थी और जतिन की उंगलियां भाभी की चूत को चोद रही थी।

“और कितनी देर चलने के बाद विराम लेना है?” मोहित ने पूछा।

“मैं अभी रुकना नहीं चाहती, थोड़ा और आगे बढ़ना चाहती हूँ…” पलक ने जवाब दिया- तुम्हारा क्या विचार है जतिन? उन्होंने जतिन से पूछा।

“हाँ भाभी, मेरा भी अभी और आगे चलते रहने का मन है…” जतिन ने कहा।

“अच्छा है, जितना आगे तक चलें उतना ही बेहतर है…” पलक मुश्कुराते हुए बोली।

“ठीक है ना?” पलक ने अपने पति से पूछा।

“हाँ मुझे भी लगता है बिना रुके जितना आगे पहुँच जायें, उतना ही बेहतर है…” उन्होंने जवाब दिया।

पलक पीछे की ओर मुड़ी और जतिन की ओर देखते हुए बोली- “मुझे भी… मैं नहीं चाहती कि तुम्हें रुकना पड़े…” पलक ने धीमी आवाज़ में कहा।

“जतिन?” मोहित बोले- तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं ना तुम्हारी भाभी के गोद में बैठने से?

“बिल्कुल नहीं। भाभी थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर अपना स्थान बदल लेती हैं जिससे एक ही जगह ज़्यादा देर भार नहीं रहता और मुझे भी आसानी रहती है…” जतिन मोहित से बात कर रहा था और भाभी की फुद्दी में अपनी उंगलियां और भी गहराई में उतारे जा रहा था। जतिन ने फिर से अपनी उंगलियां भाभी की योनि में तेज़ी से अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी थी।

पलक को अपनी सिसकारियां रोके रखने के लिए अपने होंठों को कसकर दबाए रखना पड़ रहा था। पलक ने कसकर जतिन की कलाई पकड़ ली थी। ऐसा करके पलक जतिन को यह एहसास दिलाना चाह रही थी कि उन्हें कितना आनन्द आ रहा है और वे चाहती हैं कि जतिन अपनी उंगलियां और अन्दर तक घुसाता रहे। जतिन भाभी का इशारा समझकर अपनी उंगलियों को भाभी की चूत में जितनी अन्दर तक घुसा सकता था घुसाने लगा।

 

पलक ने जतिन की उंगलियों के साथ-साथ धीरे-धीरे अपने कूल्हे भी हिलाने शुरू कर दिये। उन्होंने अपने पति की ओर देखा, खुशकिस्मती से उनके टीवी की वजह से वो कुछ नहीं देख पा रहे थे। अगर उन्हें पता होता कि जतिन की उंगलियां उनकी बीवी की चूत में घुसी हुई हैं तो जाने क्या होता। पलक का पूरा बदन जतिन की उंगलियों की गति के हिसाब से सिहर रहा था।

तभी जतिन ने अचानक से अपनी उंगलियां भाभी की चूत से बाहर निकाल ली। पलक को थोड़ी निराशा हुई, पर उन्हें ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं करना पड़ा। जतिन ने तुरन्त भाभी के कुर्ते के बटन खोलने शुरू कर दिये। पलक ने गर्मी के कारण ब्रा नहीं पहनी थी।

जैसे-जैसे जतिन भाभी के कुर्ते के ऊपर से नीचे तक के बटन खोल रहा था, पलक को गाड़ी के ए॰सी॰ की ठंडी हवा के झोंके अपनी चूचियों पर लगते महसूस हुए जिससे उनके निप्पल सख्त होने लगे। जतिन ने भाभी के कुर्ते का आखिरी बटन खोलकर कुर्ता सामने से पूरा खोल दिया।

अब पलक आगे से भी बिल्कुल निर्वस्त्र हो गई थीं। जतिन ने भाभी के नंगे बदन पर अपने हाथ ऊपर से नीचे तक फिराने शुरू कर दिये। वो भाभी की चूचियों को मसल-मसलकर उनसे खेलने लगा। पलक ने अपनी चूचियां आगे की तरफ धकेल दी ताकि जतिन अच्छे से उन्हें दबा सके। पलक ने अपने चूतड़ उठाए और अपना कुर्ता नीचे से निकालकर हटा दिया।

जतिन भाभी का इशारा समझ गया, वह अपने हाथ नीचे लेजाकर अपनी निकरके हुक खोलने लगा। पलक को एक बार फिर थोड़ा ऊपर उठना पड़ा ताकि जतिन ठीक से अपनी निकर का हुक और चेन खोल सके। जतिन का लण्ड अभी भी भाभी के चूतड़ों के ठीक बीच में सटा हुआ था, पलक ने अपने कूल्हे थोड़े और ऊपर उठा लिये।

“सब ठीक है ना पलक?” उनके पति ने पूछा- क्या तुम्हें जतिन की गोद में बैठने में दिक्कत हो रही है? क्या मैं गाड़ी रोक दूँ ताकि तुम दोनों को थोड़ी देर आराम मिल सके?
“अरे नहीं। सब ठीक है। वो तो मैं थोड़ी जगह बदल रही थी ताकि जतिन को दिक्कत ना हो। अगर मैं ठीक जगह पर बैठ जाऊँ तो हम दोनों के लिए बड़ा आराम हो जायेगा…”

भाभी के यह कहते ही जतिन ने अपने निकर और अंडरवियर खींचकर नीचे उतार दिये। पलक को जतिन का लण्ड अपने नंगे चूतड़ों के बीचोबीच फँसता हुआ महसूस हुआ।

जतिन ने अपने दोनों हाथ भाभी के चूतड़ों के दोनों ओर रखे और कहा- भाभी अगर आप थोड़ा ऊपर उठें तो मैं खुद को सही जगह पर ले आऊँ। फिर हम दोनों के लिए सब ठीक हो जायेगा…”
पलक समझ गई कि जतिन ऐसा क्यों कह रहा है, वो जितना ऊपर उठ सकती थी उतना उठ गई। जतिन का एक हाथ उनके चूतड़ से हट गया, वो समझ गई जतिन उस हाथ से क्या करने वाला है।जतिन ने अपना लण्ड पकड़कर भाभी की चूत के मुँह पर सेट किया और दूसरे हाथ से भाभी के चूतड़ को नीचे की ओर धकेल कर उन्हें नीचे आने का इशारा किया।

पलक ने धीरे-धीरे अपने चूतड़ नीचे की ओर करने शुरू कर दिये। पलक को जतिन के लौड़े का ऊपरी हिस्सा अपनी चूत के प्रवेशद्वार पर लगता हुआ महसूस हुआ। पलक और नीचे होने लगी तो जतिन का लण्ड बड़ी आराम से उनकी चूत में फिसलते हुए घुसने लगा। जैसे-जैसे पलक अपने चूतड़ नीचे ला रही थी, वैसे-वैसे जतिन का लण्ड भाभी की चूत को चौड़ा करता हुआ और अंदर घुसे जा रहा था। भाभी की गर्म और चिकनी हो चुकी चूत में लण्ड घुसाने से होने वाले एहसास से जतिन के आनन्द की सीमा ना रही।

पलक खुद को तब तक और नीचे करती रही जब तक कि जतिन का लिंग पूरी जड़ तक उनकी चूत की गहराइयों में नहीं उतर गया और फिर अपने पति मोहित से बोली- “नहीं, नहीं, रुको मत। मैं चाहती हूँ अभी तुम चलते रहो। फिलहाल अगले एक घण्टे तक भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं सही कह रही हूँ ना जतिन?

“हाँ भाभी। अब जब आप दोबारा बैठने लगीं तो मैंने खुद को सही जगह पर सेट कर लिया ताकि हमें कोई दिक्कत ना हो। बस मुझे एक बार थोड़ा ऊपर और उठना है अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो। ठीक है ना भाभी?”

“क्या मैं भी तुम्हारे साथ-साथ ऊपर उठूँ, जतिन?”

“नहीं, आप बस मेरी गोद में बैठी रहिए और मैं आपको अपने साथ-साथ खुद ऊपर उठा लूँगा…” इतना कहकर जतिन ने खुद को थोड़ा ऊपर उठाया और अपना लण्ड भाभी की चूत में और भी गहराई में घुसा दिया। पलक को एक बार तो लगा जैसे वो उसी पल स्खलित हो जाएंगी।

“चलो मैं भी खुद को थोड़ा ठीक कर लेती हूँ…” कहकर पलक ने अपनी गाण्ड आगे पीछे हिलाई जिससे जतिन का लण्ड भाभी की चूत में और अच्छी तरह अन्दर-बाहर हो गया। जतिन के लौड़े की सवारी करते-करते पलक ने अपने पति की ओर देखा। जतिन अभी भी अपना लण्ड पूरा जोर लगाकर भाभी की चूत में घुसा रहा था और पूरी गति के साथ अपनी पलक भाभी को चोद रहा था।
पलक मन ही मन सोचने लगी- मेरे बेवकूफ पति को क्या पता कि उसकी बीवी कैसे लगभग नंगी होकर, उसके इतनी पास होकर भी एक जवान लड़के से चुदाई का आनन्द ले रही है। अपने पति के इतनी पास होते हुए जतिन से चुदना पलक को बहुत ज़्यादा रोमांचित कर रहा था। तभी जतिन ने एक जोरदार धक्का लगाकर भाभी को उनके विचारों की कैद से बाहर निकाला।

जतिन ने धीरे से पलक से पूछा- आपका कितनी देर में हो जायेगा भाभी?

“बहुत जल्द जतिन, बहुत जल्द…” पलक ने उत्तर दिया।

तभी भाभी को महसूस हुआ कि उनका स्खलन होने ही वाला है, उन्होंने जतिन के दोनों हाथ अपने चूतड़ों से हटाकर अपनी चूचियों पर रख लिए और जोर से दबा दिया। जतिन जोर से भाभी की चूचियां मसलने लगा और तेज़ी से अपना लण्ड भाभी की चूत में अंदर-बाहर करने लगा,तभी उसे महसूस हुआ भाभी का पूरा बदन अकड़ने लगा और उनकी चूत की अंदरूनी दीवारें उसके लण्ड को ऐसे दबाने लगीं जैसे वो उसे निचोड़ लेना चाहती हों।

जतिन समझ गया कि भाभी स्खलित हो गई हैं।

यह शायद पलक का आज तक का सबसे लम्बे समय तक चलने वाला और सबसे आनन्ददायक स्खलन था। थककर पलक जतिन के सहारे टेक लगाकर पीछे की ओर लेट गई।
जतिन अभी भी स्खलित नहीं हुआ था, वह लगातार अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करते हुए भाभी की चूत चोदे जा रहा था। तभी जतिन ने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी से लण्ड अंदर-बाहर करते-करते एक जोर का धक्का लगाकर अपना लण्ड भाभी की चूत की गहराई में पूरा अंदर तक घुसा दिया और अपने वीर्य का फव्वारा भाभी की चूत में छोड़ दिया।
जतिन का गर्मागर्म वीर्य पलक को अपनी चूत को पूरा भरता हुआ महसूस हुआ। पलक तब तक ऐसे ही पड़ी रही जब तक कि जतिन ने अपने लण्ड से वीर्य की आखिरी बूँद उनकी चूत में नहीं खाली कर दी। जतिन और पलक भाभी दोनों ही अब तक थक चुके थे।

“एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर लिखा हुआ है लगभग दस किलोमीटर दूर एक रेस्टोरेंट है। क्या तुम दोनों को भूख लग गई है?” पलक के पति मोहित ने पूछा।

“हाँ, मेरे ख्याल से हमें कुछ खा लेना चाहिये…” जतिन ने कहा।

पलक ने पीछे मुड़कर जतिन की ओर देखा तो वह मुश्कुरा दिया- आप क्या कहती हो भाभी?” जतिन ने पूछा।

“वैसे तो मैं एकदम फुल हूँ, पर मेरे खयाल से कुछ हल्का-फुल्का खाया जा सकता है…” पलक ने शरारती अंदाज़ में जतिन की ओर आँख मारते हुए कहा। पलक झुकी और अपनी पैंटी उठाने लगी जो काफी देर से नीचे पड़ी थी। उसी समय जतिन का लण्ड उनकी चूत से फिसल कर बाहर निकल गया। पलक ने अपने पाँव अपनी पैंटी में डाले और उसे ऊपर की ओर खींच लिया।

जैसे ही उनकी पैंटी उनकी चूत को ढकने वाली थी, तभी जतिन ने एक बार फिर अपनी उंगली उनकी चूत में घुसा दी। पलक ने प्यार भरे अंदाज़ में जतिन के हाथ पर थपकी दी और जतिन ने अपनी उंगली बाहर निकाल ली। फिर पलक ने अपनी सलवार पहनकर नाड़ा बांध लिया और फिर अपने कुर्ते के बटन बन्द करने लगीं।

जतिन ने भी अपनी निकर और अण्डरवीयर फिर से पहन लिए और अपना लौड़ा अन्दर करके ज़िप बन्द कर ली।

“खाना खाने के बाद कितना रास्ता और बचा है?” पलक ने अपने पति से पूछा।

“बस आधा घण्टा और, मेरे ख्याल से तब तक तो तुम दोनों काम चला ही लोगे?” उनके पति ने कहा।

“मुझे कोई दिक्कत नहीं है…”पलक ने अपने पति से कहा- “अगर जतिन को मेरे गोद में बैठने से दिक्कत ना हो तो मैं तो चार घण्टे और इस तरह से बैठ सकती हूँ।

“तुम्हारा क्या कहना है जतिन? तुम्हें तो अपनी भाभी को गोद में आधा घण्टा और बैठाए रखने में कोई दिक्कत नहीं होगी ना? मुझे लगा था तुम दोनों में से कोई एक तो अब तक परेशान हो ही गया होगा…”

“अरे नहीं भैया। मुझे भी कोई परेशानी नहीं है। अगर भाभी चार घण्टे और मेरी गोद में बैठी रहें तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है…” यह कहकर उसने भाभी की ओर देखा, वह पहले से ही जतिन की ओर देखकर मुश्कुरा रही थीं।

*****  समाप्त *****

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