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गांड चुद कर गोदाम हो गई !

दोस्तो, मेरा नाम रोनीता है. मेरी हाइट 5 फिट 4 इंच है और रंग मीडियम गोरा है.
मेरी फिगर साइज कुछ इस तरह से है. सीना 34 इंच, कमर 30 इंच और गांड 36 इंच की है जो कि बहुत बाहर निकली हुई है.
जब मैं गांड मटका कर चलती हूँ, तब जवान लड़कों की बात तो छोड़िए, बूढ़े आदमी भी चश्मा लगा कर गांड की थिरकन देखते हैं.

और आजकल तो दिन पर दिन मेरी गांड का साइज बढ़ता जा रहा है.

अभी मेरी उम्र 26 साल की है, पर मैंने आपको जहां सन 2017 में छोड़ा था, आज की सेक्स कहानी को मैं वहीं से शुरू करूंगी क्योंकि इन 6 सालों में मेरी लाइफ में अनेकों सेक्सी घटनाएं घटी हैं.
उन सभी को मैं एक एक करके सेक्स कहानी के रूप में आपके सम्मुख पेश करूंगी.

दोस्तो, आपने मेरी 6 साल पहले लिखी हुई कहानियां पढ़ी होंगी!
अगर नहीं पढ़ी हैं, तो प्लीज पहले पढ़ लो क्योंकि मेरी कहानियों से सिर्फ लड़कों के लंड ही खड़े नहीं होते, उनके लंड के नीचे के पहरेदार यानि टट्टों में भी नए खून का संचार होने लगता है.

लड़कियों की चूत की गहराई में बच्चेदानी तक में झनझनाहट होने लगती है और उनकी चूत का पानी टपकने लगता है.
ऐसा मेरे पाठक पाठिकाएं मेल द्वारा बताते हैं.

इसी लिए कह रही हूँ दोस्तों कि यदि आपने मेरी कहानियां नहीं पढ़ीं, तो प्लीज जरूर पढ़ें.

मेरा दावा है कि आपके लंड या चूत में पानी ना आ जाए, तो आप इस रोनीता को भूल जाना … और यदि आपने पढ़ी हैं … तो भी मेरे प्यारे दोस्तो प्लीज़ फिर से पढ़ो, जिससे पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी.

दोस्तो, मैंने कितने दर्द सहे हैं, यह मैं आपको लिख कर तो बता सकती हूं … पर महसूस नहीं करा सकती.
रोनीता का दर्द रोनीताही जाने.

जब पापा ने मुझे फिर से चुदवाते हुए रंगे हाथ अपने ही घर में देख लिया, तो वे भड़क गए.
उसके बाद तो मेरी जो पिटाई हुई, वह मैं कभी भूल ही नहीं सकती.
बाप ने डंडों से ऐसी गांड बजाई और पीटी कि वैसी हालत कभी मेरे दुश्मन की भी ना हो.

पापा की पिटाई से सारी रात मेरी सूजी हुई गांड ने दर्द दिया और मुझे सोने ही नहीं दिया.
मैं उल्टी सोती, तो मुझे नींद नहीं आती. पर मैं क्या करती.

इस पिटाई के बाद मैंने पक्का ठान लिया था कि अब मैं खुद को काबू में रखूंगी, चाहे कुछ भी हो.
मेरी खुद की चूत मेरा नहीं मानेगी, तो मैं साली को चाकू से काट कर कुत्तों को डाल दूंगी.

यह मैं स्टाम्प पेपर में लिखकर देती हूं.

मैंने फिर से ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया कि मैं सुधर जाऊंगी और जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती, तब तक मैं लंड का मुँह तक नहीं देखूँगी.
कम से कम ऐसे दिन तो देखने ना पड़ेंगे.

मुझे ठीक होने में बीस दिन लगे.
वह बीस दिन का दर्द मैं कभी नहीं भूल सकती.

चार दिन तक में चल बैठ नहीं सकी, सात दिन तक मेरी प्यारी बाहर निकली मक्खन जैसी गांड ने खूब दर्द किया.

दोस्तो, दिन बीतते गए.
मैंने अपनी चूत चुदाई पर कंट्रोल करना सीख लिया था.

परंतु हमारे अड़ोस पड़ोस वाले मुझे ऐसे घूरते मानो मैंने कोई बड़ा कांड कर दिया हो … जैसे किसी आंतकवादी संगठन से मेरा नाता हो और ग्यारह मुल्क की पुलिस मुझे ढूंढ रही हो.

उन्हीं दिनों पड़ोस में एक शादी थी.
उधर जाने का न्योता आया तो मैं और मेरे परिवार के लोग वहां डिनर करने गए.

गांड चुद कर गोदाम हो गई !

वहां मुझे मेरी कई सहेलियां मिलीं परन्तु कई सहेलियों ने मुँह फेर लिया तो कई मुझसे डरते डरते बात कर रही थीं.
बात करते समय उनकी आंखें इधर उधर देख रही थीं मानो उन्हें डर हो कि कोई देख ना ले!

मेरी एक पुरानी और पक्की सहेली भी वहीं आई थी.
वह मेरे साथ पहली क्लास से बारहवीं कक्षा तक मेरे साथ रही थी.
उसका नाम नेहा था, वह मुझ से बात कर रही थी.

तभी उसके पापा और मम्मी आए और मेरी तरफ घूरकर नेहा से बोले- घर चलो नेहा बेटी. कैसे कैसे बेशर्म लोगों को शादी में बुलाया है.
यह कहकर कुछ कुछ बड़बड़ाते हुए वे लोग नेहा को लेकर चले गए.

इस घटना ने मुझे अन्दर से हिला डाला.

मेरी सब पुरानी सहेलियां मुझसे दूर हो गईं और लोग मुझे देखकर आपस में खुशफुस करते हुए हंसने लगे.

मुझे खुद को भी ऐसा लगने लगा कि मैं कोई बहुत बड़ी वाली छिनाल हूं.

शादी से लौटकर हम सब घर आए तो मेरा चेहरा उतरा हुआ था.

मैं अपने कमरे में जाकर रोने लगी.
मेरा रोना बन्द ही नहीं हो रहा था.

तभी वर्षा कमरे में सोने आई और मुझे देखकर बोली- क्या हुआ रोनीता दीदी?
मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी

वह समझ गई और बोली- रोनीता दीदी, यह दुनिया खराब है, जो पकड़ा जाए वह चोर है … बाकी सब साधु हैं. तुम जरा सा भी टेंशन ना लो. थोड़े समय बाद सब भूल जाएंगे, सब सामान्य हो जाएगा. दुनिया में ऐसा ही चलता रहता है.

ऐसी घड़ी में मेरी छोटी बहन वर्षा ने मुझे हमेशा सहारा दिया है.

उसने हंसते हुए यह भी कहा- दीदी, लड़कियों की चूत चुदाई के लिए ही बनी है और लड़कों का लौड़ा चूत चुदाई के लिए ही बना होता है. कोई गड्डा खुदाई के लिए नहीं होता है.

अपनी छोटी बहन वर्षा की इस तरह की खुली बातें सुनकर मुझे बड़ा सुकून मिला और हम दोनों बहनें सो गईं.

अब एक महीने से ज्यादा हो गया था.
इस दरमियान मेरे मन में चुदाई का एक भी विचार नहीं आया था.

एक रात मुझे अचानक सपना आया.
सपने में डोरबेल बजी.

मैं घर में अकेली थी.
मैंने दरवाजा खोला तो पवन आया था.
पवन के बारे में जानने के लिए मेरी कहानी
कामवासना से बेबस मैं क्या करती
पढ़ें.
उसे देख कर मैंने जैसे ही दरवाजा बंद करना चाहा तो वह मुझे धक्का देकर घर के अन्दर आ गया.

मैं कुछ करती … तब तक वह दरवाजा बंद भी कर चुका था.

वह मुझे अपनी बांहों में भरकर बोला- मेरी प्यारी रोनीता डार्लिंग, मैं तुमसे दूर नहीं रह सकता. मुझे माफ कर दो.
इतना कह कर वह अपनी पैंट की जिप खोलकर मुझे अपना लंड दिखाने लगा.

उसको पता था कि मेरी मजबूरी क्या है.
मैं जब भी लंड देख लेती हूं, फिर मुझसे रहा नहीं जाता.

मैं उसका लंड देखना नहीं चाहती थी इसलिए मैं दूसरी तरफ घूम गई.
मैंने गुस्से से पवन से कहा- कितने बेशर्म हो तुम … मेरे घर से बाहर निकलो विश्वासघाती कुत्ते कहीं के … नहीं तो मैं चिल्लाऊंगी!

पवन बोला- माया, तुम्हारी भरी भरी बाहर निकली गांड को मैं कभी भूल नहीं सकता. प्लीज़ मुझे एक और आखिरी बार माफ कर दो!
मैं बोली- जब मेरी इस गांड पर लाठियां बरसाई गईं, तब तुम तो मुझे अकेला मार खाने के लिए छोड़कर भाग गए थे. तुम मेरे पापा के सामने नहीं बोल सके कि तुम मुझसे प्यार करते हो … उल्टा तुमने मेरे पापा को बुड्ढा बोला और सब आरोप मुझ पर ही लगा दिए … और तुमने न जाने क्या क्या बोला था कि तुम्हारी बेटी को मेरा लंड पसंद है … मुझे उसकी शक्ल तक पसंद नहीं है! वह सब मैं कैसे भूल सकती हूं? तुमने मेरे दिल को तोड़ दिया था!

पवन बोला- सॉरी रोनीता मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी थी सॉरी … सॉरी हजार बार सॉरी!
यह कहकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरा मुँह अपने हाथ से दबा दिया.

वह जबरन मुझे गले में किस करने लगा और अपना लंड मेरी गांड में बिना सलवार खोले दबाने लगा.
मैंने काफी कोशिशें की उससे छूटने की, पर सब नाकाम रहीं.

फिर वह अपना एक हाथ मेरी सलवार में डालकर चूत पर रगड़ने लगा.
मैं बहुत छटपटाई, पर उसके ताकतवर हाथों से छूट ना सकी.

उस वक्त मैं उन्नीस साल की कमसिन कली. वह पच्चीस साल का गबरू पत्थर उठाने वाला लोहे जैसा सख्त हाथ वाला मर्द था.
वह कोई कप्यूटर की-बोर्ड चलाने वाले लड़कियों जैसे मखमली हाथ वाला झण्डू नहीं था.

उसने करीबन दस मिनट तक बिना कुछ बोले मेरी चूत को रगड़ा.
इससे मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मेरी सांसें तेज होने लगीं.

उसने अपना हाथ मेरे मुँह से हटा लिया.
पर मेरे मुँह से आह आहहह की आवाज निकलने लगी थी.

मैं इतनी मदहोश हो गई थी कि उसके हाथ को अपनी चूत पर दबाने लगी- आहह आह ओहह करते रहो … आह!

अब पवन का दूसरा हाथ मेरे स्तन दबाने लगा.
मैं गर्मा गई और कहने लगी- आह और दबाओ … दबाते रहो आह हह आह … मसल डालो मुझे … आह!

वह और जोर जोर से मेरे स्तन मसलने लगा.
मेरे स्तन लाल हो चुके थे.
मुझे काफी दर्द हो रहा था और मेरी आंखों से पानी भी निकल रहा था.

पर दोस्तो, मुझे यह दर्द फिर भी मीठा लग रहा था.
मैं जोरों से चिल्ला रही थी- और जोर से दबाओ पवन आह हह!

पवन ने मुझे पीछे से पकड़ा हुआ था.
उसने मुझे घुमा कर अपनी तरफ कर लिया.

मेरी आंखें बंद थीं.
वह मेरी तरफ देखने लगा.
मेरी आंखों से आंसुओं की धाराएं बह रही थीं.

मैं आंखें बंद किए हुई जोरों से चिल्ला रही थी- आह पवन … और दबाओ मेरे स्तनों को निचोड़ दो … आहह!

तभी उसने मेरे स्तनों को दबाना रोक दिया.
मेरी आंखें खुल गईं.

मैंने गहरी सांस लेते हुए, कांपते लबों से उससे पूछा- क्या हुआ पवन … रुक क्यों गए?
वह बोला- तेरी आंखों से आंसू बह रहे हैं और तेरे चूचे भी लाल होकर सूज गए हैं. तुझे दर्द हो रहा है क्या?

मैं मदहोशी में बोली- दर्द होने दो ऐसे दर्द से मुझे खुशी मिलती है … कुछ नहीं होगा यार … दो चार दिन मेरे चूचे दर्द करेंगे और ज्यादा से ज्यादा दो दिन बुखार हो जाएगा, पर तुम अपनी हसरत पूरी करो!

उसने मेरे स्तनों को छोड़ दिया और घुटनों के बल बैठकर मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर मेरी चूत चाटने लगा.

मेरी आंखें फिर से बंद हो गईं और अपने आप मेरे मुँह से आह की आवाज निकलने लगी.
पूरे रूम में मेरी आहह आह की आवाज ही गूंज रही थी.

गांड चुद कर गोदाम हो गई !

पवन को भी चूत चाटने का गजब का अनुभव था.
वह अपनी जीभ को मेरी चूत की गहराई तक अन्दर बाहर करता और बीच बीच में मेरी चूत की बाहर निकली हुई पंखुड़ियों को अपने दांतों से हल्का सा काटता तो मुझे स्वर्ग सी अनुभूति होती.
मेरे मुँह से आह निकल जाती और मैं उसका सिर अपनी चूत पर दबा देती.

करीब दस मिनट तक उसने मेरी चूत को चाटा.
फिर उसने मुझे जमीन पर ही उल्टा लिटा कर मेरे दोनों चूतड़ों को अपने ताकतवर हाथों से फैलाया और अपनी जीभ मेरी गांड की रिंग पर फेरने लगा.

वह बोला- कितने दिनों से तेरी गांड नहीं मारी रोनीता… तेरी गांड पर तो मैं सारी दुनिया कुर्बान कर दूं माया!
फिर उसने मेरी गांड में ऐसी जीभ लपलपाई कि मैं निहाल हो गई. हॉट लड़की गांड फक के लिए बेचैन हो गयी.
उसकी जीभ की रगड़ का सुख कह ही नहीं सकती.

मैंने कई दिनों से गांड नहीं मरायी थी, इस वजह से मेरी गांड सिकुड़ चुकी थी.
उसकी जीभ और थूक की लार ने मेरी गांड के छेद को काफी बड़ा बना दिया था.

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था.
मैंने पवन से कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो … तड़पाओ मत मेरी जान … आह अब रहा नहीं जाता!

यह सुनते ही पवन अचानक से रुक गया.
मैंने पूछा- क्यों रुक गए. मेरी गांड में अपना लंड डाल दो और मेरी गांड को अपने गर्म वीर्य से भर दो आह मेरी गांड को ठंडी कर दो. फिर मेरी चूत को इतना चोदो कि आज वह भोसड़ा बन जाए.

मेरे प्यारे दोस्तो, इधर मैं आपको एक ज्ञान की बात बता दूँ. चूत वह चीज होती है, जिसमें थूक अथवा तेल-वेल कुछ लगाए बिना उंगली ही नहीं घुसती है.

इसके इतर जिन जिन लड़कियों की चूत चुद चुदकर भोसड़ा बन गई हो, वह हमेशा के लिए चाहे लड़की खड़ी हो, चाहे बैठी हो चाहे चल रही हो … और चाहे बिस्तर पर सोई हो … उसके भोसड़े के अन्दर उंगली जितना छेद खुला ही रह जाता है.
मतलब पूरी तरह से छेद बंद नहीं होता है. इस तरह की चूत को चूत नहीं, बल्कि भोसड़ा कहा जाता है.

वह बोला- तू अकेले ही मजा लेगी साली. पहले मेरा लंड चूस भोसड़ी की कुतिया … फिर देख आज तेरी गांड और चूत का कैसा मस्त फालूदा बनाऊंगा अपने इस फौलादी लंड से!

उसका लंड ज्यादा बड़ा नहीं था, बस 6 इंच का ही था. पर सख्त इतना कि लोहे की रॉड हो.

मैंने झट से उसका लंड अपने हाथों से पकड़ा.
उसके लंड में से भी चिपचिपा पानी निकल रहा था.

मैंने लंड पर निकले उस पानी को चाट लिया और एक सांस में लंड अपने मुँह में पूरा ले लिया.
पवन के मुँह से आह हह निकल गई.

दोस्तो, मुझे भी लंड चूसने का अनुभव हो चुका है.
पहले पहले तो मुझे पूरा लंड मुँह में निगलना नहीं आता था … उल्टी या खाँसी हो जाती थी.
पर दोस्तो अब मैं पूरे लंड को अन्दर निगल कर देर तक सांस रोक कर मौत को छूकर वापस आ सकती हूं.

वाह क्या डायलॉग मार दिया शाबाश रोनीता डार्लिंग …

फिर मैंने उसके लंड को ऐसा चूसा कि लंड का ऊपर का भाग लाल हो गया.

पवन का अब वीर्य निकलने वाला ही था, तब उसने कहा- रोनीता आह … मेरा पानी निकलने वाला है!
मैंने उसका लंड मुँह से निकाला और जल्दी से उल्टी हो गई.

मैंने कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो. मैं वीर्य की एक भी बूंद वेस्ट जाने नहीं दे सकती!

उसने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ा और गांड के छेद पर सैट कर दिया.
मुझे उसके लंड का अग्र भाग गर्म गर्म महसूस हो रहा था.

वह बोला- डालता हूं माया!
मैंने कहा- अब पूछना कैसा … जल्दी डालो मेरी गांड की गर्मी शांत करो और भूलना नहीं साले … सारा वीर्य मेरी गांड में ही जाना चाहिए समझे, नहीं तो चूची से तेरी गांड मार दूँगी.

उसने मेरी गांड पर थूका और अपना लंड मेरी गांड पर सैट करके जोर लगाकर फच से मेरी गांड में उतार दिया.

मेरी ना चाहते हुए भी चीख निकल गई- उई ईईई माँ!

मैं ऐसी छटपटाई और बोली- प्लीज निकालो अभी … फिर थोड़ी देर बाद में डाल लेना.

उस कमीने मेरी एक नहीं सुनी, उल्टा मेरा मुँह दबा दिया और मेरी गांड मारता रहा.

फिर अचानक से मेरा सपना टूट गया.
सुबह हो गई थी … मेरी नींद खुल चुकी थी.

मैं बिस्तर पर पड़ी पड़ी मन ही मन में पवन को गालियां देने लगी थी ‘कुत्ता कहीं का …’

इस सपने का अर्थ यह था कि मैं अब भी उसे नहीं भूल पा रही थी.

पहले वह मुझे वास्तव में चोदता था … अब भोसड़ी का मेरे सपनों में भी मेरी गांड मार जाता है.

मैं बिस्तर से उठ कर बैठी तो मेरा शरीर भारी भारी लग रहा था.
सिर दर्द भी था.

कमरे में मैं और मेरी छोटी बहन वर्षा एक ही बेड पर सोती हैं. वह स्कूल में बारहवीं में है.
वह रोज सुबह 6 बजे उठकर नहाकर नाश्ता करके 7 बजे स्कूल चली जाती है.
आज वह जा चुकी थी.

मैं मुँह धोने के लिए बिस्तर से उठी तो मेरी गांड और मेरे चूचे बहुत दर्द कर रहे थे.

मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.
मेरे कमरे में ही ड्रेसिंग टेबल है, उसमें एक बड़ा सा आईना लगा है.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बारीकी से अपने जिस्म को देखने लगी.

मेरे स्तन एकदम लाल और सूज चुके थे और मैंने घूमकर अपनी गांड को आईने में देखा, तो उसमें चिपचिपा सफेद पानी बह रहा था और मेरी गांड का छेद लाल लाल टमाटर सा हो गया था.

मैंने अपनी गांड में एक उंगली डाली, तो वह आराम से चली गयी.
मैंने दो उंगलियां डालीं, वे भी चली गईं.

मैं स्तब्ध रह गयी कि मुझे सपना आया था कि हकीकत में कोई भोसड़ी का मेरी गांड मार गया?

 

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